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Pratinidhi Kahaniyan : Bhagwaticharan Verma

Bhagwaticharan Verma

Rs. 75

इस कथाकृति में सुविख्यात उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा की कुछ ऐसी कहानियाँ दी गई हैं जिनका न केवल हिन्दी में, बल्कि समूचे भारतीय कथा-साहित्य में उल्लेखनीय स्थान है। व्यक्ति-मन की गूढ़ भावनाओं अथवा उसकी अवचेतनगत बारीकियों में पाठक को उलझाना इन कहानियों का उद्देश्य नहीं, उद्देश्य है समकालीन भारतीय समाज के... Read More

Description

इस कथाकृति में सुविख्यात उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा की कुछ ऐसी कहानियाँ दी गई हैं जिनका न केवल हिन्दी में, बल्कि समूचे भारतीय कथा-साहित्य में उल्लेखनीय स्थान है। व्यक्ति-मन की गूढ़ भावनाओं अथवा उसकी अवचेतनगत बारीकियों में पाठक को उलझाना इन कहानियों का उद्देश्य नहीं, उद्देश्य है समकालीन भारतीय समाज के संघटक अनेकानेक व्यक्ति-चरित्रों का उद्घाटन। इन्हीं चरित्रों के माध्यम से हम भारतीय समाज के प्रमुख अन्तर्विरोधों तथा उसकी ख़ूबियों और ख़ामियों से परिचित होते हैं। लगता है, हम अपने ही आसपास की जीवित सच्चाइयों और वर्गीय विविधताओं से गुज़र रहे हैं। इन कहानियों की चरित्रप्रधान विषयवस्तु और व्यंग्यात्मक भाषा-शैली प्रेमचन्दोत्तर हिन्दी-कहानी के एक दौर की विशिष्ट पहचान है। इस दृष्टि से इन कहानियों का ऐतिहासिक महत्त्व भी है। Is kathakriti mein suvikhyat upanyaskar bhagavtichran varma ki kuchh aisi kahaniyan di gai hain jinka na keval hindi mein, balki samuche bhartiy katha-sahitya mein ullekhniy sthan hai. Vyakti-man ki gudh bhavnaon athva uski avchetangat barikiyon mein pathak ko uljhana in kahaniyon ka uddeshya nahin, uddeshya hai samkalin bhartiy samaj ke sanghtak anekanek vyakti-charitron ka udghatan. Inhin charitron ke madhyam se hum bhartiy samaj ke prmukh antarvirodhon tatha uski khubiyon aur khamiyon se parichit hote hain. Lagta hai, hum apne hi aaspas ki jivit sachchaiyon aur vargiy vividhtaon se guzar rahe hain. In kahaniyon ki charitraprdhan vishayvastu aur vyangyatmak bhasha-shaili premchandottar hindi-kahani ke ek daur ki vishisht pahchan hai. Is drishti se in kahaniyon ka aitihasik mahattv bhi hai.