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Prabhawati

Suryakant Tripathi 'Nirala'

Rs. 199 Rs. 177

महाकवि निराला के उपन्यास-साहित्य में ‘प्रभावती’ एक ऐतिहासिक उपन्यास-कृति के रूप में चर्चित है। इसका कथा-फलक पृथ्वीराज-जयचन्दकालीन राजाओं और सामन्तों के पारस्परिक संघर्ष पर आधारित है। इस संघर्ष का कारण प्रायः विवाह और कन्यादान हुआ करता था। प्रभावती भी, जो एक क़िलेदार की कुमारी है, एक ऐसे ही संघर्ष का... Read More

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Description

महाकवि निराला के उपन्यास-साहित्य में ‘प्रभावती’ एक ऐतिहासिक उपन्यास-कृति के रूप में चर्चित है।
इसका कथा-फलक पृथ्वीराज-जयचन्दकालीन राजाओं और सामन्तों के पारस्परिक संघर्ष पर आधारित है। इस संघर्ष का कारण प्रायः विवाह और कन्यादान हुआ करता था।
प्रभावती भी, जो एक क़िलेदार की कुमारी है, एक ऐसे ही संघर्ष का केन्द्र है। लेकिन इस स्वाभिमानी नारी-चरित्र के पीछे निराला का उद्देश्य आधुनिक भारतीय नारियों में संघर्ष-चेतना का विकास करना भी रहा है। यही कारण है कि प्रभावती और यमुना—जैसे नारी-पात्र स्वयं खड्गहस्त हैं और नैतिकता के लिए कोई भी बलिदान करने को सन्नद्ध हैं।
वस्तुतः निराला के गहरे ऐतिहासिक बोध और कवि-कल्पना का इस उपन्यास में अद्भुत सम्मिश्रण हुआ है—ओज और माधुर्य का अपूर्व निर्वाह। Mahakavi nirala ke upanyas-sahitya mein ‘prbhavti’ ek aitihasik upanyas-kriti ke rup mein charchit hai. Iska katha-phalak prithviraj-jaychandkalin rajaon aur samanton ke parasprik sangharsh par aadharit hai. Is sangharsh ka karan prayः vivah aur kanyadan hua karta tha.
Prbhavti bhi, jo ek qiledar ki kumari hai, ek aise hi sangharsh ka kendr hai. Lekin is svabhimani nari-charitr ke pichhe nirala ka uddeshya aadhunik bhartiy nariyon mein sangharsh-chetna ka vikas karna bhi raha hai. Yahi karan hai ki prbhavti aur yamuna—jaise nari-patr svayan khadghast hain aur naitikta ke liye koi bhi balidan karne ko sannaddh hain.
Vastutः nirala ke gahre aitihasik bodh aur kavi-kalpna ka is upanyas mein adbhut sammishran hua hai—oj aur madhurya ka apurv nirvah.