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Prabandh Pratima

Suryakant Tripathi 'Nirala'

Rs. 250 Rs. 223

निराला कवि होने के साथ-साथ विचारक भी थे, अपने देश-काल के प्रति सजग विचारक। यही कारण है कि उनका रचना-कर्म केवल कविता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कहानी, उपन्यास, आलोचना, निबन्ध आदि भी लिखे और इन विधाओं में भी अपना विशिष्ट स्थान बनाया। ‘प्रबंध प्रतिमा’ निराला जी के लेखों... Read More

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Description

निराला कवि होने के साथ-साथ विचारक भी थे, अपने देश-काल के प्रति सजग विचारक। यही कारण है कि उनका रचना-कर्म केवल कविता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कहानी, उपन्यास, आलोचना, निबन्ध आदि भी लिखे और इन विधाओं में भी अपना विशिष्ट स्थान बनाया।
‘प्रबंध प्रतिमा’ निराला जी के लेखों का दूसरा संकलन है। इसमें अधिकांश विचार-प्रधान लेख हैं, कुछ संस्मरणात्मक भी हैं, जैसे : ‘गांधी जी से बातचीत’, ‘नेहरू जी से दो बातें’, ‘प्रान्तीय साहित्य सम्मेलन’। विचार-प्रधान लेखों में पाँच लेख सामाजिक समस्याओं पर हैं तथा ‘महर्षि दयानन्द सरस्वती और युगान्तर’ एवं ‘साहित्यिक सन्निपात या वर्तमान धर्म’ शीर्षक लेखों में निराला के धर्मविषयक चिन्तन को अभिव्यक्ति मिली है। बाक़ी सब लेख साहित्यिक विषयों पर हैं, लेकिन यहाँ भी उन्होंने एक तरफ़ विद्यापति और चंडीदास सरीखे प्राचीन कवियों पर विचार किया है, तो दूसरी तरफ़ अपने समकालीन साहित्यकारों तथा प्रवृत्तियों पर टिप्पणियाँ की हैं।
संक्षेप में, ‘प्रबंध प्रतिमा’ साहित्यिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों पर निराला के विचारोत्तेजक लेखों का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। Nirala kavi hone ke sath-sath vicharak bhi the, apne desh-kal ke prati sajag vicharak. Yahi karan hai ki unka rachna-karm keval kavita tak simit nahin raha, balki unhonne kahani, upanyas, aalochna, nibandh aadi bhi likhe aur in vidhaon mein bhi apna vishisht sthan banaya. ‘prbandh pratima’ nirala ji ke lekhon ka dusra sanklan hai. Ismen adhikansh vichar-prdhan lekh hain, kuchh sansmarnatmak bhi hain, jaise : ‘gandhi ji se batchit’, ‘nehru ji se do baten’, ‘prantiy sahitya sammelan’. Vichar-prdhan lekhon mein panch lekh samajik samasyaon par hain tatha ‘maharshi dayanand sarasvti aur yugantar’ evan ‘sahityik sannipat ya vartman dharm’ shirshak lekhon mein nirala ke dharmavishyak chintan ko abhivyakti mili hai. Baqi sab lekh sahityik vishyon par hain, lekin yahan bhi unhonne ek taraf vidyapati aur chandidas sarikhe prachin kaviyon par vichar kiya hai, to dusri taraf apne samkalin sahitykaron tatha prvrittiyon par tippaniyan ki hain.
Sankshep mein, ‘prbandh pratima’ sahityik, samajik evan rajnitik vishyon par nirala ke vicharottejak lekhon ka mahattvpurn dastavez hai.