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Parti Parikatha

Phanishwarnath Renu

Rs. 895 Rs. 797

Rajkamal Prakashan

इस उपन्यास को पढ़ते हुए प्रत्येक संवेदनशील पाठक स्पन्दनीय ज़िन्दगी के सप्राण पन्नों को उलटता हुआ-सा अनुभव करेगा। सहृदयता के सहज-संचित कोष के रस से सराबोर प्रत्येक शब्द, हर गीत की आधी-पूरी कड़ी ने मानव-मन के अन्तरतम को प्रत्यक्ष और सजीव कर दिया है। दो पीढ़ियों के जीवन के विस्तृत... Read More

Description

इस उपन्यास को पढ़ते हुए प्रत्येक संवेदनशील पाठक स्पन्दनीय ज़िन्दगी के सप्राण पन्नों को उलटता हुआ-सा अनुभव करेगा। सहृदयता के सहज-संचित कोष के रस से सराबोर प्रत्येक शब्द, हर गीत की आधी-पूरी कड़ी ने मानव-मन के अन्तरतम को प्रत्यक्ष और सजीव कर दिया है। दो पीढ़ियों के जीवन के विस्तृत चित्रपट पर अनगिनत महीन और लयपूर्ण रेखाओं की सहायता से चतुर कथाशिल्पी ने एक अमित कथाचित्र का प्रणयन किया है। इस महाकाव्यात्मक उपन्यास को पढ़कर समाप्त करने तक पाठक अनेक चरित्रों, घटना-प्रसंगों, संवादों और वर्णन-शैली के चमत्कारों से इतना सामीप्य अनुभव करने लगेंगे कि उनसे बिछुड़ना एक बार उनके हृदय में अवश्य कसक पैदा करके रहेगा। Is upanyas ko padhte hue pratyek sanvedanshil pathak spandniy zindagi ke sapran pannon ko ulatta hua-sa anubhav karega. Sahridayta ke sahaj-sanchit kosh ke ras se sarabor pratyek shabd, har git ki aadhi-puri kadi ne manav-man ke antartam ko pratyaksh aur sajiv kar diya hai. Do pidhiyon ke jivan ke vistrit chitrpat par anaginat mahin aur laypurn rekhaon ki sahayta se chatur kathashilpi ne ek amit kathachitr ka pranyan kiya hai. Is mahakavyatmak upanyas ko padhkar samapt karne tak pathak anek charitron, ghatna-prsangon, sanvadon aur varnan-shaili ke chamatkaron se itna samipya anubhav karne lagenge ki unse bichhudna ek baar unke hriday mein avashya kasak paida karke rahega.