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Nava-e-Sarosh : Voices from Beyond

Rs. 499 Rs. 349

About Book Through the ages, Delhi has had an effect on its inhabitants. Steeped in a rich history of cultural mingling and periods of creative exchange, the city provided fertile ground for poetic synthesis. Delhi established a legacy of poets whose words set hearts ablaze for the times to come.... Read More

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Description

About Book

Through the ages, Delhi has had an effect on its inhabitants. Steeped in a rich history of cultural mingling and periods of creative exchange, the city provided fertile ground for poetic synthesis. Delhi established a legacy of poets whose words set hearts ablaze for the times to come. Love, with all its wine-infused passions and experiences of yearning, has preoccupied classic poets of the city. It also offers to the reader rhymed English transcreations of the selected ghazals so that the work can be enjoyed for the rhythm that the original Urdu-language embraces. As a patron of Urdu poetry and a resident of Delhi, Sanjiv Saraf's personal investment in preserving and furthering the arts in the Urdu world led to the creation of this book. His careful curation and trans-creations render these ghazals readable to novices of classic Urdu poetry. The selection of works that made their way to this book caters to a wide readership-those reading to experience Delhi from the past, those who wish to engage with the musicality of rhymed verses and, most significantly, those who wish to explore the themes of love as conceptualized by classic poets. Desire, longing and the complexities of love are therefore open to exploration for you, dear reader and lover, through the words laid out in these ghazals by the 'voices from beyond'.

About Author

संजीव सराफ़ पॉलिप्लेक्स कार्पोरेशन लि. के संस्थापक, अध्यक्ष और मुख्य अंशधारक हैं। यह कार्पोरेशन दुनिया में पी.ई.टी फ़िल्में बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है।

श्री संजीव सराफ़ ने आरंभिक शिक्षा सिंधिया स्कूल में हासिल की और फिर आई.आई.टी खड़गपुर से 1980 में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने ओडिशा में अपना पुश्तैनी कारोबार संभाला और फिर पॉलिप्लेक्स के रूप में औद्योगिक जगत में अपनी विशिष्ट छवि बनाई। इस कंपनी की पहचान उन्होंने अनुशंसनीय मूल्यों के आधार पर बनाई जिसकी औद्योगिक जगत में बहुत सराहना हुई। पॉलिप्लेक्स भारत और थाईलैंड की एक पंजीकृत कंपनी है।

श्री सराफ़ ने व्यापार के दूसरे क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट सफलताएँ प्राप्त की हैं। उन्होंने ‘मनुपत्र’ नामक क़ानूनी सूचना उपलब्ध करनेवाली वेबसाइट भी बनाई है। पर्यावरण से अपने गहरे सरोकार को दर्शाते हुए उन्होंने अक्षय उर्जा के क्षेत्र में भी निवेश किया जिसके फलस्वरूप पंजाब, उत्तराखंड और सिक्किम में पन-बिजली प्रॉजेक्ट स्थापित किये गए। वह कई कंपनियों के बोर्ड के सक्रिय सदस्य भी हैं।

श्री सराफ़ उदार और मानवतावादी व्यक्ति हैं जो कंपनी की लोकहितकारी गतिविधियों में भी रूचि रखते हैं। इन गतिविधियों के अंतर्गत एक चैरिटेबल स्कूल भी चलाया जा रहा है जिसमें 1200 बच्चे शिक्षा पा रहे हैं। श्री सराफ़ को पढ़ने का ज़बर्दस्त शौक़ है। उन्हें उर्दू शायरी से गहरा भावनात्मक लगाव है और उन्होंने उर्दू लिपि भी सीखी है। उन्हें चित्रकला और संगीत से भी गहरा प्रेम है।