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Na Rahoon Kisi Ka Dastnigar

Captain Abbas Ali

Rs. 895 Rs. 797

यह किताब भारतीय समाज और उसकी सभ्यता के एक हज़ार वर्षों के परिवर्तनों का संक्षिप्त मगर जीवन्त दस्तावेज़ है। इस किताब में राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान रही धाराओं ख़ासकर नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के कांग्रेस छोड़ने और ‘आज़ाद हिन्द फौज़’ का गठन कर देश की आज़ादी के लिए लड़ी गई लड़ाई... Read More

Description

यह किताब भारतीय समाज और उसकी सभ्यता के एक हज़ार वर्षों के परिवर्तनों का संक्षिप्त मगर जीवन्त दस्तावेज़ है। इस किताब में राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान रही धाराओं ख़ासकर नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के कांग्रेस छोड़ने और ‘आज़ाद हिन्द फौज़’ का गठन कर देश की आज़ादी के लिए लड़ी गई लड़ाई का ज़िक्र विस्तार से किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि ‘आज़ाद हिन्द फौज़’ के सिपाहियों के साथ स्वतंत्र भारत की सरकार ने कैसा बर्ताव और सुलूक किया।
इस किताब में आज़ादी के बाद क़रीब तीन दशकों तक चले समाजवादी आन्दोलन, उसकी टूट, एका और बिखराव का बहुत ही सजीव चित्रण किया गया है। साथ ही इस आन्दोलन में भाग लेनेवाले प्रमुख नेताओं—आचार्य नरेन्द्र देव, डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और उनके सहयोगियों के राजनीतिक चरित्र का वस्तुगत वर्णन और विश्लेषण ईमानदारी के साथ किया गया है। एक मायने में यह आत्मकथा इतिहास की उन विकृतियों की ओर इशारा करती है जो अभी भी जनमानस में गहरी पैठ किए हुए हैं और जिनका सुधारा जाना ज़रूरी है। Ye kitab bhartiy samaj aur uski sabhyta ke ek hazar varshon ke parivartnon ka sankshipt magar jivant dastavez hai. Is kitab mein rashtriy aandolan ke dauran rahi dharaon khaskar netaji subhashchandr bos ke kangres chhodne aur ‘azad hind phauz’ ka gathan kar desh ki aazadi ke liye ladi gai ladai ka zikr vistar se kiya gaya hai. Saath hi ye bhi bataya gaya hai ki ‘azad hind phauz’ ke sipahiyon ke saath svtantr bharat ki sarkar ne kaisa bartav aur suluk kiya. Is kitab mein aazadi ke baad qarib tin dashkon tak chale samajvadi aandolan, uski tut, eka aur bikhrav ka bahut hi sajiv chitran kiya gaya hai. Saath hi is aandolan mein bhag lenevale prmukh netaon—acharya narendr dev, dau. Ramamnohar lohiya, jayaprkash narayan aur unke sahyogiyon ke rajnitik charitr ka vastugat varnan aur vishleshan iimandari ke saath kiya gaya hai. Ek mayne mein ye aatmaktha itihas ki un vikritiyon ki or ishara karti hai jo abhi bhi janmanas mein gahri paith kiye hue hain aur jinka sudhara jana zaruri hai.