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Mewat Ka Johad

Rajendra Singh

Rs. 400 Rs. 356

मेवात कैसे बना? मेवात का जनमानस आज क्या चाहता है? क्या कर रहा है? मेवात के संकट से जूझते लोग, बाज़ार की लूट, पानी और खेती की लूट रोकने की दिशा में हुए काम–––क़ुदरत की हिफ़ाज़त के काम हैं। इन क़ुदरती कामों में आज भी महात्मा गांधी की प्रेरणा की... Read More

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Description

मेवात कैसे बना? मेवात का जनमानस आज क्या चाहता है? क्या कर रहा है? मेवात के संकट से जूझते लोग, बाज़ार की लूट, पानी और खेती की लूट रोकने की दिशा में हुए काम–––क़ुदरत की हिफ़ाज़त के काम हैं। इन क़ुदरती कामों में आज भी महात्मा गांधी की प्रेरणा की सार्थकता है। युगपुरुष बापू के चले जाने के बाद भी युवाओं द्वारा उनसे प्रेरित होकर ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन के रचनात्मक कार्यों से लेकर सत्याग्रह तक की चरणबद्ध दास्तान इस पुस्तक में है।
यह पुस्तक देश–दुनिया और मेवात को बापू के जौहर से प्रेरित करके सबकी भलाई का काम जोहड़ बनाने–बचाने पर राज–समाज को लगाने की कथा है; जौहर से जोहड़ तक की यात्रा है। यह पुस्तक आज के मेवात का दर्शन कराती है। इसमें जोहड़ से जुड़ते लोग, पानी की लूट रोकने का सत्याग्रह, मेवात के 40 शराब कारख़ाने बन्द कराना तथा मेवात के पानीदार बने गाँवों का वर्णन है।
मेवात के पानी, परम्परा और खेती का वर्णन बापू के जौहर से जोहड़ तक किया गया है। बापू क़ुदरत के करिश्मे को जानते और समझते थे। इसलिए उन्होंने कहा था, “क़ुदरत सभी की ज़रूरत पूरी कर सकती है लेकिन एक व्यक्ति के लालच को पूरा नहीं कर सकती है।” वे क़ुदरत का बहुत सम्मान करते थे। उन्हें माननेवाले भी क़ुदरत का सम्मान करते हैं। मेवात में उनकी कुछ तरंगें काम कर रही थीं। इसलिए मेवात में समाज–श्रम से जोहड़ बन गए। मेवात में बापू का जौहर जारी है। यह पुस्तक बापू के जौहर को मेवात में जगाने का काम करती है। Mevat kaise bana? mevat ka janmanas aaj kya chahta hai? kya kar raha hai? mevat ke sankat se jujhte log, bazar ki lut, pani aur kheti ki lut rokne ki disha mein hue kam–––qudrat ki hifazat ke kaam hain. In qudarti kamon mein aaj bhi mahatma gandhi ki prerna ki sarthakta hai. Yugapurush bapu ke chale jane ke baad bhi yuvaon dvara unse prerit hokar gram svraj, gram svavlamban ke rachnatmak karyon se lekar satyagrah tak ki charanbaddh dastan is pustak mein hai. Ye pustak desh–duniya aur mevat ko bapu ke jauhar se prerit karke sabki bhalai ka kaam johad banane–bachane par raj–samaj ko lagane ki katha hai; jauhar se johad tak ki yatra hai. Ye pustak aaj ke mevat ka darshan karati hai. Ismen johad se judte log, pani ki lut rokne ka satyagrah, mevat ke 40 sharab karkhane band karana tatha mevat ke panidar bane ganvon ka varnan hai.
Mevat ke pani, parampra aur kheti ka varnan bapu ke jauhar se johad tak kiya gaya hai. Bapu qudrat ke karishme ko jante aur samajhte the. Isaliye unhonne kaha tha, “qudrat sabhi ki zarurat puri kar sakti hai lekin ek vyakti ke lalach ko pura nahin kar sakti hai. ” ve qudrat ka bahut samman karte the. Unhen mannevale bhi qudrat ka samman karte hain. Mevat mein unki kuchh tarangen kaam kar rahi thin. Isaliye mevat mein samaj–shram se johad ban ge. Mevat mein bapu ka jauhar jari hai. Ye pustak bapu ke jauhar ko mevat mein jagane ka kaam karti hai.