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Meeta Ki Kahani

Vijay Tendulkar Translated by Vasant Dev

Rs. 125 Rs. 113

Vani Prakashan

चिरकाल से चली आ रही परम्पराओं, रीति-रिवाजों के विरुद्ध यदि कोई आचरण करता है या आवाज़ उठाने का साहस करता है तो अहं खंडित होने के कारण समाज उसे स्वीकार नहीं करता और बदले में मिलता है तिरस्कार, उपेक्षा, वेदना। विजय तेंडुलकर द्वारा लिखित यह नाटक ‘मीता’ मानवीय सम्बन्धों के... Read More

Description

चिरकाल से चली आ रही परम्पराओं, रीति-रिवाजों के विरुद्ध यदि कोई आचरण करता है या आवाज़ उठाने का साहस करता है तो अहं खंडित होने के कारण समाज उसे स्वीकार नहीं करता और बदले में मिलता है तिरस्कार, उपेक्षा, वेदना। विजय तेंडुलकर द्वारा लिखित यह नाटक ‘मीता’ मानवीय सम्बन्धों के विवादास्पद आयामों पर आधारित है। एक वयस्क युवती का अपनी स्त्री मित्र के प्रति आकर्षण व भावनाओं का विश्लेषण इस नाटक के माध्यम से हुआ है। मीता स्त्री-पुरुषों के सम्बन्ध को अस्वीकार कर स्त्री मित्र के सम्बन्धों को स्वीकार करके कुण्ठित, नकारात्मक जीवन जीती है, यही उसकी त्रासद नियति है। तेंडुलकर ने इस नाटक को ममता और कोमलता के छुअन के साथ लिखा है। chirkal se chali aa rahi parampraon, riti rivajon ke viruddh yadi koi achran karta hai ya avaz uthane ka sahas karta hai to ahan khanDit hone ke karan samaj use svikar nahin karta aur badle mein milta hai tiraskar, upeksha, vedna. vijay tenDulkar dvara likhit ye natak ‘mita’ manviy sambandhon ke vivadaspad ayamon par adharit hai. ek vayask yuvti ka apni stri mitr ke prati akarshan va bhavnaon ka vishleshan is natak ke madhyam se hua hai. mita stri purushon ke sambandh ko asvikar kar stri mitr ke sambandhon ko svikar karke kunthit, nakaratmak jivan jiti hai, yahi uski trasad niyati hai. tenDulkar ne is natak ko mamta aur komalta ke chhuan ke saath likha hai.