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Marx Trotsaki Aur Ashiyayi Samaj

Rs. 300 Rs. 267

पुराने इतिहास का विवेचन वर्तमान काल की राजनीति से कहीं-न-कहीं जुड़ा होता है। इस इतिहास से देश के छात्रों और अध्यापकों को गहरी दिलचस्पी है। ऐसे काफ़ी लोग हैं जो साहित्य का अध्ययन करते हुए उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को समझना चाहते हैं। जो लोग मार्क्सवादी ढंग से इतिहास का विश्लेषण... Read More

Description

पुराने इतिहास का विवेचन वर्तमान काल की राजनीति से कहीं-न-कहीं जुड़ा होता है। इस इतिहास से देश के छात्रों और अध्यापकों को गहरी दिलचस्पी है। ऐसे काफ़ी लोग हैं जो साहित्य का अध्ययन करते हुए उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को समझना चाहते हैं। जो लोग मार्क्सवादी ढंग से इतिहास का विश्लेषण करना चाहते हैं, उनकी संख्या बराबर बढ़ रही है। किन्तु शिक्षा केन्द्रों में अधिकतर मेलोत्ती, ऐंडरसन और बैरिंगटन मूर जैसे लेखकों की कृतियाँ ही उन्हें सुलभ होती हैं। इनके प्रभाव से वे मार्क्सवाद और त्रोत्स्कीवाद में भेद नहीं कर पाते। आशा है, इस तरह का भेद करने के लिए कुछ आवश्यक सामग्री उन्हें इस पुस्तक में मिलेगी।
यह पुस्तक पुराने इतिहास के प्रति सही दृष्टिकोण अपनाने के अलावा आज की अन्तरराष्ट्रीय परिस्थिति के विश्लेषण में भी सहायक हो सकती है। Purane itihas ka vivechan vartman kaal ki rajniti se kahin-na-kahin juda hota hai. Is itihas se desh ke chhatron aur adhyapkon ko gahri dilchaspi hai. Aise kafi log hain jo sahitya ka adhyyan karte hue uski samajik prishthbhumi ko samajhna chahte hain. Jo log marksvadi dhang se itihas ka vishleshan karna chahte hain, unki sankhya barabar badh rahi hai. Kintu shiksha kendron mein adhiktar melotti, aindarsan aur bairingtan mur jaise lekhkon ki kritiyan hi unhen sulabh hoti hain. Inke prbhav se ve marksvad aur trotskivad mein bhed nahin kar pate. Aasha hai, is tarah ka bhed karne ke liye kuchh aavashyak samagri unhen is pustak mein milegi. Ye pustak purane itihas ke prati sahi drishtikon apnane ke alava aaj ki antarrashtriy paristhiti ke vishleshan mein bhi sahayak ho sakti hai.