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Manak Hindi Aur Haryanavi Ka Vyatireki Adhyayan

Prof. Naresh Mishr

Rs. 695 Rs. 626

Vani Prakashan

“हरियाणवी हिंदी की प्रमुख बोली है। प्रयोग संदर्भ में सशक्त भाषा है। हरियाणा से भिन्न प्रदेश के लोगों को लगता है कि पूरे प्रदेश की हरियाणवी का एक ही स्वरूप है, किंतु यहाँ केंद्रीय, कौरवी, ब्रज, बागड़ी, मेवाती, अहीरवाटी और अंबालवी हरियाणवी रूप सहजता में प्रयुक्त होते हैं। व्यावहारिक प्रयोग... Read More

Description

“हरियाणवी हिंदी की प्रमुख बोली है। प्रयोग संदर्भ में सशक्त भाषा है। हरियाणा से भिन्न प्रदेश के लोगों को लगता है कि पूरे प्रदेश की हरियाणवी का एक ही स्वरूप है, किंतु यहाँ केंद्रीय, कौरवी, ब्रज, बागड़ी, मेवाती, अहीरवाटी और अंबालवी हरियाणवी रूप सहजता में प्रयुक्त होते हैं। व्यावहारिक प्रयोग के व्यतिरेक को रेखांकन के लिए उच्चारित स्वरूप पर गंभीरता से चिंतन की अपेक्षा होती है और ऐसा ही किया है। ‘मानक हिंदी और हरियाणवी व्यतिरेकी अध्ययन’ में मानक हिंदी से हरियाणवी के विविध रूपों के व्यतिरेक का विश्लेषण कर दोनों की विशेषताओं के साथ स्वभाषा बोली और भिन्न भाषा शिक्षण का दिग्दर्शन कराने का प्रयास किया है।” “hariyanvi hindi ki prmukh boli hai. pryog sandarbh mein sashakt bhasha hai. hariyana se bhinn prdesh ke logon ko lagta hai ki pure prdesh ki hariyanvi ka ek hi svroop hai, kintu yahan kendriy, kaurvi, braj, bagDi, mevati, ahirvati aur ambalvi hariyanvi roop sahajta mein pryukt hote hain. vyavharik pryog ke vyatirek ko rekhankan ke liye uchcharit svroop par gambhirta se chintan ki apeksha hoti hai aur aisa hi kiya hai. ‘manak hindi aur hariyanvi vyatireki adhyyan’ mein manak hindi se hariyanvi ke vividh rupon ke vyatirek ka vishleshan kar donon ki visheshtaon ke saath svbhasha boli aur bhinn bhasha shikshan ka digdarshan karane ka pryaas kiya hai. ”