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Mallika

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हमारे समय में सामाजिक यथार्थ और सामाजिकता का ऐसा आतंक है कि प्रेम-कविता की जगह घटती गई है—उसे सामाजिकता से भटकाव की विधा तक करार दिया गया है। ऐसे प्रेम-वंचित समय में ओड़िया के प्रसिद्ध कवि देवदास छोटराय की प्रेम कविताओं का हिन्दी के प्रसिद्ध कवि-आलोचक प्रभात त्रिपाठी के अनुवाद... Read More

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Description

हमारे समय में सामाजिक यथार्थ और सामाजिकता का ऐसा आतंक है कि प्रेम-कविता की जगह घटती गई है—उसे सामाजिकता से भटकाव की विधा तक करार दिया गया है। ऐसे प्रेम-वंचित समय में ओड़िया के प्रसिद्ध कवि देवदास छोटराय की प्रेम कविताओं का हिन्दी के प्रसिद्ध कवि-आलोचक प्रभात त्रिपाठी के अनुवाद में यह संचयन ताज़ी हवा की तरह है। प्रेम मनुष्य का स्थायी भाव है और उसका कविता में अन्वेषण सदियों से कविता के लिए अनिवार्य रहा है। ओड़िया में, सौभाग्य से, जातीय स्मृति सक्रिय-सजीव है और वह इस कविता में अन्त:ध्वनित होती रहती है। हिन्दी में इस अनुवाद का महत्त्व इसलिए होगा कि यह कविता में प्रेम और स्मृति के पुनर्वास की कविता है। रज़ा फ़ाउंडेशन इस पुस्तक को सहर्ष प्रकाशित कर रहा है।
—अशोक वाजपेयी Hamare samay mein samajik yatharth aur samajikta ka aisa aatank hai ki prem-kavita ki jagah ghatti gai hai—use samajikta se bhatkav ki vidha tak karar diya gaya hai. Aise prem-vanchit samay mein odiya ke prsiddh kavi devdas chhotray ki prem kavitaon ka hindi ke prsiddh kavi-alochak prbhat tripathi ke anuvad mein ye sanchyan tazi hava ki tarah hai. Prem manushya ka sthayi bhav hai aur uska kavita mein anveshan sadiyon se kavita ke liye anivarya raha hai. Odiya mein, saubhagya se, jatiy smriti sakriy-sajiv hai aur vah is kavita mein ant:dhvnit hoti rahti hai. Hindi mein is anuvad ka mahattv isaliye hoga ki ye kavita mein prem aur smriti ke punarvas ki kavita hai. Raza faundeshan is pustak ko saharsh prkashit kar raha hai. —ashok vajpeyi