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Maharana Pratap

Suryakant Tripathi 'Nirala'

Rs. 250 Rs. 223

महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पर्याय हैं। वे एक कठिन और उथल-पुथल भरे काल-खंड में पैदा हुए थे, जब मुग़लों की सत्ता समूचे भारत पर छाई हुई थी और मुग़ल सम्राट अकबर अपनी विशिष्ट कार्य-शैली के कारण ‘महान’ कहा जा रहा था। लेकिन महाराणा प्रताप... Read More

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Description

महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पर्याय हैं। वे एक कठिन और उथल-पुथल भरे काल-खंड में पैदा हुए थे, जब मुग़लों की सत्ता समूचे भारत पर छाई हुई थी और मुग़ल सम्राट अकबर अपनी विशिष्ट कार्य-शैली के कारण ‘महान’ कहा जा रहा था। लेकिन महाराणा प्रताप उसकी ‘महानता’ के पीछे छिपी उसकी साम्राज्यवादी आकांक्षा के विरुद्ध थे, इसलिए उन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। परिणामस्वरूप अकबर उनके विरुद्ध युद्ध में उतरा। इस प्रक्रिया में महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महान लोकनायक और वीर पुरुष के रूप में सदा-सदा के लिए भारतीय इतिहास में प्रतिष्ठित कर दिया।
महाकवि निराला ने प्रताप के इसी प्रेरक चरित्र को तथ्यात्मक ढंग से चित्रित किया है।
मुख्य रूप से यह पुस्तक किशोर पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई है, लेकिन इसकी प्रांजल भाषा-शैली और तथ्यपरकता इसे एक महापुरुष की ऐतिहासिक जीवनी का महत्त्व प्रदान कर देती है। Maharana prtap bhartiy itihas mein virta aur rashtriy svabhiman ke paryay hain. Ve ek kathin aur uthal-puthal bhare kal-khand mein paida hue the, jab muglon ki satta samuche bharat par chhai hui thi aur mugal samrat akbar apni vishisht karya-shaili ke karan ‘mahan’ kaha ja raha tha. Lekin maharana prtap uski ‘mahanta’ ke pichhe chhipi uski samrajyvadi aakanksha ke viruddh the, isaliye unhonne uski adhinta svikar nahin ki. Parinamasvrup akbar unke viruddh yuddh mein utra. Is prakriya mein maharana prtap ne jis virta, svabhiman aur tyagmay jivan ko varan kiya, usi ne unhen ek mahan loknayak aur vir purush ke rup mein sada-sada ke liye bhartiy itihas mein prtishthit kar diya. Mahakavi nirala ne prtap ke isi prerak charitr ko tathyatmak dhang se chitrit kiya hai.
Mukhya rup se ye pustak kishor pathkon ko dhyan mein rakhkar likhi gai hai, lekin iski pranjal bhasha-shaili aur tathyaparakta ise ek mahapurush ki aitihasik jivni ka mahattv prdan kar deti hai.