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Mahan Vaigyanik Mahilaye

Gunakar Muley

Rs. 300 Rs. 267

प्राचीनकाल से नारी को सर्जनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता रहा है। सम्भवतः इसीलिए प्रकृति की कल्पना भी नारी रूप में ही की गई है। स्त्री का सहजबोध, उसकी जिजीविषा और रचनात्मकता उसे पुरुष से श्रेष्ठ नहीं तो उसके बराबर तो बना ही देती है। फिर भी यह आश्चर्यजनक है... Read More

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Description

प्राचीनकाल से नारी को सर्जनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता रहा है। सम्भवतः इसीलिए प्रकृति की कल्पना भी नारी रूप में ही की गई है। स्त्री का सहजबोध, उसकी जिजीविषा और रचनात्मकता उसे पुरुष से श्रेष्ठ नहीं तो उसके बराबर तो बना ही देती है।
फिर भी यह आश्चर्यजनक है कि प्राचीनकाल में रानियाँ हुईं, वीरांगनाएँ हुईं, सन्त और कवयित्रियाँ हुईं, लेकिन एक लम्बे कालखंड तक किसी महिला वैज्ञानिक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती। पहली महिला वैज्ञानिक के रूप में हमें चौथी सदी में सिकन्दरिया के यूनानी विद्या केन्द्र में हाइपेशिया का पता चलता है।
लेकिन आधुनिक युग में जैसे-जैसे शिक्षा और समानता-आधारित लोकतंत्र का विकास हुआ, हमें अनेक महिला वैज्ञानिकों की जानकारी मिलती है जिन्हें समय-समय पर नोबेल पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया और विज्ञान के क्षेत्र में जिनका योगदान किसी पुरुष वैज्ञानिक से कम नहीं है।
यह पुस्तक हाइपेशिया से लेकर आधुनिक युग तक की ऐसी ही दस महिला वैज्ञानिकों और उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों का परिचय देती है। कहने की आवश्यकता नहीं कि इस पुस्तक से विज्ञान में रुचि रखनेवाले पाठकों को कई स्तरों पर लाभ होगा। Prachinkal se nari ko sarjnatmak shakti ka prtik mana jata raha hai. Sambhvatः isiliye prkriti ki kalpna bhi nari rup mein hi ki gai hai. Stri ka sahajbodh, uski jijivisha aur rachnatmakta use purush se shreshth nahin to uske barabar to bana hi deti hai. Phir bhi ye aashcharyajnak hai ki prachinkal mein raniyan huin, virangnayen huin, sant aur kavyitriyan huin, lekin ek lambe kalkhand tak kisi mahila vaigyanik ke bare mein koi jankari nahin milti. Pahli mahila vaigyanik ke rup mein hamein chauthi sadi mein sikandariya ke yunani vidya kendr mein haipeshiya ka pata chalta hai.
Lekin aadhunik yug mein jaise-jaise shiksha aur samanta-adharit loktantr ka vikas hua, hamein anek mahila vaigyanikon ki jankari milti hai jinhen samay-samay par nobel puraskaron se bhi sammanit kiya gaya aur vigyan ke kshetr mein jinka yogdan kisi purush vaigyanik se kam nahin hai.
Ye pustak haipeshiya se lekar aadhunik yug tak ki aisi hi das mahila vaigyanikon aur unki vaigyanik uplabdhiyon ka parichay deti hai. Kahne ki aavashyakta nahin ki is pustak se vigyan mein ruchi rakhnevale pathkon ko kai stron par labh hoga.