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Mahamoh (Ahilya Ki Jivani)

Dr. Pratibha Rai

Rs. 350 Rs. 312

यदि अहल्या ‘सौन्दर्य’ का प्रतीक है, इन्द्र ‘भोग’ का; गौतम ‘अहं’ का प्रतीक है तो राम ‘त्याग’ एवं ‘भाव’ के प्रतीक हैं। सौन्दर्य का केवल स्थूल रूप ही नहीं होता—सूक्ष्म तत्त्व भी होता है। सौन्दर्य का तत्त्व न समझ पाने पर सौन्दर्य और सौन्दर्यग्राही दोनों ही सौन्दर्य का खंडित रूप... Read More

Description

यदि अहल्या ‘सौन्दर्य’ का प्रतीक है, इन्द्र ‘भोग’ का; गौतम ‘अहं’ का प्रतीक है तो राम ‘त्याग’ एवं ‘भाव’ के प्रतीक हैं। सौन्दर्य का केवल स्थूल रूप ही नहीं होता—सूक्ष्म तत्त्व भी होता है। सौन्दर्य का तत्त्व न समझ पाने पर सौन्दर्य और सौन्दर्यग्राही दोनों ही सौन्दर्य का खंडित रूप ही देख पाते हैं। सौन्दर्य मोह पैदा करता है, और मोहभंग भी करता है। इन्द्र का रूप मोह उत्पन्न करता है, जबकि राम के रूप ने अहल्या का मोहभंग किया है। मोह और मोहभंग के उतार-चढ़ाव के बीच आत्ममुग्धा अहल्या स्वयं ही बन गईं मोह का कारण और स्वयं ही मोह का लक्ष्य। इन्द्र मोह ने अहल्या को पाप की ओर प्रेरित किया था, जबकि राम-भाव ने प्रेरित किया था—मोक्ष की ओर। पाप से मोक्ष तक के उत्तरण पथ पर गौतम थे एक दंडाधिकारी प्रशासक मात्र। अहल्या की प्रेमाकांक्षा का रामाकांक्षा में बदल जाना ही अहल्या की तपस्या और मोक्ष है।
युगों से परे ‘महामोह’ है इन्द्र, गौतम और अहल्या के मोह एवं मोहभंग का आख्यान—भ्रान्ति और उत्थान की आख्यायिका। Yadi ahalya ‘saundarya’ ka prtik hai, indr ‘bhog’ kaa; gautam ‘ahan’ ka prtik hai to raam ‘tyag’ evan ‘bhav’ ke prtik hain. Saundarya ka keval sthul rup hi nahin hota—sukshm tattv bhi hota hai. Saundarya ka tattv na samajh pane par saundarya aur saundaryagrahi donon hi saundarya ka khandit rup hi dekh pate hain. Saundarya moh paida karta hai, aur mohbhang bhi karta hai. Indr ka rup moh utpann karta hai, jabaki raam ke rup ne ahalya ka mohbhang kiya hai. Moh aur mohbhang ke utar-chadhav ke bich aatmmugdha ahalya svayan hi ban gain moh ka karan aur svayan hi moh ka lakshya. Indr moh ne ahalya ko paap ki or prerit kiya tha, jabaki ram-bhav ne prerit kiya tha—moksh ki or. Paap se moksh tak ke uttran path par gautam the ek dandadhikari prshasak matr. Ahalya ki premakanksha ka ramakanksha mein badal jana hi ahalya ki tapasya aur moksh hai. Yugon se pare ‘mahamoh’ hai indr, gautam aur ahalya ke moh evan mohbhang ka aakhyan—bhranti aur utthan ki aakhyayika.