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Madhuyamini

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महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक भी होती हैं और मर्मस्पर्शी भी। अन्तर्मन की गहरी परतें उघाड़नेवाली ये... Read More

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Description

महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक भी होती हैं और मर्मस्पर्शी भी। अन्तर्मन की गहरी परतें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ। इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही नहीं पाते।
प्रस्तुत संग्रह में ‘तोप’, ‘मधुयामिनी’, ‘प्रतिशोध’, ‘मरण सागर पारे’, ‘गजदन्त’, ‘मित्र’, ‘दादी’, ‘भीलनी’, ‘चलोगी चन्द्रिका?’ एवं ‘गन्धारी’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी। Mahila kathakaron mein jitni khyati aur lokapriyta shivani ne prapt ki hai, vah ek udahran hai shreshth lekhan ke lokapriy hone ka. Shivani lokapriyta ke shikhar ko chhu lenevali aisi hasti hain, jinki lekhni se upji kahaniyan kalatmak bhi hoti hain aur marmasparshi bhi. Antarman ki gahri parten ughadnevali ye marmik kahaniyan shivani ki apni maulik pahchan hain jiske karan unka apna ek vyapak pathak varg taiyar hua. Inki kahaniyan na keval shreshth sahityik uplabdhiyan hain, balki rochak bhi itni hain ki aap ek baar shuru karke puri padhe bina chhod hi nahin pate. Prastut sangrah mein ‘top’, ‘madhuyamini’, ‘pratishodh’, ‘maran sagar pare’, ‘gajdant’, ‘mitr’, ‘dadi’, ‘bhilni’, ‘chalogi chandrika?’ evan ‘gandhari’ kahaniyan sanklit hain. Har katha apni mohak shaili mein abhibhut kar dene ki apar kshamta rakhti hai. Kalatmak kaushal ke saath rachi gai ye kahaniyan hamari dharohar hain jinhen aaj ki nai pidhi avashya padhna chahegi.