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Lockdown Ke Dauran Maut Ka Zindaginama - Pragya Sharma

Rs. 149.00 Rs. 119.00

About Book प्रस्तुत किताब 'रेख़्ता हर्फ़-ए-ताज़ा’ सिलसिले के तहत प्रकाशित उर्दू और हिंदी की संधि-रेखा पर स्थित ज़बान को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने वाली प्रज्ञा शर्मा का ताज़ा काव्य-संग्रह है| इस किताब में लॉकडाउन के दौरान इंसानी मन-मस्तिष्क में उभरने वाली विभिन्न भावनाओं एवं आशंकाओं को अभिव्यक्त किया गया है|... Read More

Description

About Book

प्रस्तुत किताब 'रेख़्ता हर्फ़-ए-ताज़ा’ सिलसिले के तहत प्रकाशित उर्दू और हिंदी की संधि-रेखा पर स्थित ज़बान को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने वाली प्रज्ञा शर्मा का ताज़ा काव्य-संग्रह है| इस किताब में लॉकडाउन के दौरान इंसानी मन-मस्तिष्क में उभरने वाली विभिन्न भावनाओं एवं आशंकाओं को अभिव्यक्त किया गया है| यह किताब देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है|

About Author

उर्दू और हिंदी की संधि-रेखा पर स्थित ज़बान को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने वाली प्रज्ञा शर्मा का जन्म 1981 में कानपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। उन्होंने शिक्षा शास्त्र में पोस्ट-ग्रैजुएशन किया है। पिता श्री बी. एल. शर्मा और माँ श्रीमती रमा शर्मा की प्रेरणा से कुछ दिन शिक्षण का काम करने के बा’द उन्होंने कवि सम्मेलनों और मुशाइ’रों में अपनी पहचान स्थापित की और फिर ये सब छोड़ कर अपने आपको तन्हाई की रचनात्मकता के सुपुर्द कर दिया। इन दिनों मुम्बई में निवास है। ‘गोपाल दास नीरज की हस्तलिखित कविताएँ’ नाम से उनकी एक किताब 2019 में प्रकाशित हुई थी।