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Lava

Javed Akhtar

Rs. 450 Rs. 401

लावा कुछ बिछड़ने के भी तरीक़े हैं खैर, जाने दो जो गया जैसे थकन से चूर पास आया था इसके गिरा सोते में मुझपर ये शजर क्यों इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में ढूँढ़ता फिरा उसको वो नगर-नगर तन्हा आज वो भी बिछड़ गया हमसे चलिए, ये... Read More

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Description

लावा कुछ बिछड़ने के भी तरीक़े हैं खैर, जाने दो जो गया जैसे थकन से चूर पास आया था इसके गिरा सोते में मुझपर ये शजर क्यों इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में ढूँढ़ता फिरा उसको वो नगर-नगर तन्हा आज वो भी बिछड़ गया हमसे चलिए, ये क़िस्सा भी तमाम हुआ ढलकी शानों से हर यक़ीं की क़बा ज़िंदगी ले रही है अंगड़ाई पुर-सुकूँ लगती है कितनी झील के पानी पे बत पैरों की बेताबियाँ पानी के अंदर देखिए बहुत आसान है पहचान इसकी अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है जो मंतज़िर न मिला वो तो हम हैं शर्मिंदा कि हमने देर लगा दी पलटके आने में आज फिर दिल है कुछ उदास-उदास देखिए आज याद आए कौन न कोई इश्क़ है बाक़ी न कोई परचम है लोग दीवाने भला किसके सबब से हो जाएँ Lava kuchh bichhadne ke bhi tariqe hain khair, jane do jo gaya jaise thakan se chur paas aaya tha iske gira sote mein mujhpar ye shajar kyon ik khilauna jogi se kho gaya tha bachpan mein dhundhata phira usko vo nagar-nagar tanha aaj vo bhi bichhad gaya hamse chaliye, ye qissa bhi tamam hua dhalki shanon se har yaqin ki qaba zindagi le rahi hai angdai pur-sukun lagti hai kitni jhil ke pani pe bat pairon ki betabiyan pani ke andar dekhiye bahut aasan hai pahchan iski agar dukhta nahin to dil nahin hai jo mantzir na mila vo to hum hain sharminda ki hamne der laga di palatke aane mein aaj phir dil hai kuchh udas-udas dekhiye aaj yaad aae kaun na koi ishq hai baqi na koi parcham hai log divane bhala kiske sabab se ho jayen