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Lalmaniyan Tatha Anya Kahaniyan

Maitreyi Pushpa

Rs. 125 Rs. 111

नब्बे के दशक में जिन रचनाकारों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और जिन्हें पाठकों ने भी हाथों-हाथ लिया, मैत्रेयी पुष्पा का नाम उनमें प्रमुख है! आज वे हिन्दी साहित्य-परिदृश्य की एक महत्त्वपूर्ण उपस्थिति हैं। उन्होंने हिन्दी कथा-धारा को वापस गाँव की ओर मोड़ा और कई अविस्मरणीय चरित्र हमें दिए। इन... Read More

Description

नब्बे के दशक में जिन रचनाकारों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और जिन्हें पाठकों ने भी हाथों-हाथ लिया, मैत्रेयी पुष्पा का नाम उनमें प्रमुख है! आज वे हिन्दी साहित्य-परिदृश्य की एक महत्त्वपूर्ण उपस्थिति हैं। उन्होंने हिन्दी कथा-धारा को वापस गाँव की ओर मोड़ा और कई अविस्मरणीय चरित्र हमें दिए। इन चरित्रों ने शहरी-मध्यवर्ग को उस देश की याद दिलाई जो धीरे-धीरे शब्द की दुनिया से ग़ायब हो चला था। ‘इदन्नमम’ की मंदा, 'चाक' की सारंग, ‘अल्मा कबूतरी’ की अल्मा और ‘झूला नट’ की शीलो, ऐसे अनेक चरित्र हैं जिन्हें मैत्रेयी जी ने अपनी समर्थ दृश्यात्मक भाषा और गहरे जुड़ाव के साथ आकार दिया है।
यहाँ प्रस्तुत कहानियों में भाषागत बिम्बों और दृश्यों को सजीव कर देने की अपनी अद्भुत क्षमता के साथ वे जिस पाठ की रचना करती हैं, उसे पढ़ना कथा-रस के एक विलक्षण अनुभव से गुज़रना है। ‘ललमनियाँ’ की मौहरो, ‘रिजक’ कहानी की लल्लन, ‘पगला गई है भागवती!’ की भागो या ‘सिस्टर’ की डोरोथी, ये सब स्त्रियाँ अपने परिस्थितिगत गहरे करुणा भाव के साथ पाठक के मन में गहरे उतर जाती हैं, और यह चीज़ लेखिका की भाषा-सामर्थ्य और गहरे चरित्र-बोध को सिद्ध करती है। Nabbe ke dashak mein jin rachnakaron ne apni vishisht pahchan banai aur jinhen pathkon ne bhi hathon-hath liya, maitreyi pushpa ka naam unmen prmukh hai! aaj ve hindi sahitya-paridrishya ki ek mahattvpurn upasthiti hain. Unhonne hindi katha-dhara ko vapas ganv ki or moda aur kai avismarniy charitr hamein diye. In charitron ne shahri-madhyvarg ko us desh ki yaad dilai jo dhire-dhire shabd ki duniya se gayab ho chala tha. ‘idannmam’ ki manda, chak ki sarang, ‘alma kabutri’ ki alma aur ‘jhula nat’ ki shilo, aise anek charitr hain jinhen maitreyi ji ne apni samarth drishyatmak bhasha aur gahre judav ke saath aakar diya hai. Yahan prastut kahaniyon mein bhashagat bimbon aur drishyon ko sajiv kar dene ki apni adbhut kshamta ke saath ve jis path ki rachna karti hain, use padhna katha-ras ke ek vilakshan anubhav se guzarna hai. ‘lalamaniyan’ ki mauhro, ‘rijak’ kahani ki lallan, ‘pagla gai hai bhagavti!’ ki bhago ya ‘sistar’ ki dorothi, ye sab striyan apne paristhitigat gahre karuna bhav ke saath pathak ke man mein gahre utar jati hain, aur ye chiz lekhika ki bhasha-samarthya aur gahre charitr-bodh ko siddh karti hai.