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Kumbhipak : Stri Jijeevisha Ki Kimat Par Phalate-Phoolate Narak Ki Kahani

Nagarjun

Rs. 150 Rs. 134

नरक की रचना जिन जीवन-स्थितियों से हुई होगी, नागार्जुन का यह उपन्यास उन्हीं के शब्दांकन का परिणाम है। एक ही मकान में रहनेवाले छह किराएदारों की जीवनचर्या पर केन्द्रित यह उपन्यास हमारे ‘विकासमान' नागर-जीवन के जिस सामाजिक यथार्थ की परतें खोलता है, प्रकारान्तर से वह समूचे भारतीय जीवन का यथार्थ... Read More

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Description

नरक की रचना जिन जीवन-स्थितियों से हुई होगी, नागार्जुन का यह उपन्यास उन्हीं के शब्दांकन का परिणाम है। एक ही मकान में रहनेवाले छह किराएदारों की जीवनचर्या पर केन्द्रित यह उपन्यास हमारे ‘विकासमान' नागर-जीवन के जिस सामाजिक यथार्थ की परतें खोलता है, प्रकारान्तर से वह समूचे भारतीय जीवन का यथार्थ है, क्योंकि स्त्री के प्रति पदार्थवादी नज़रिए की कहीं कोई कमी नहीं। आर्थिक अभावों में पिसती अनेकानेक निर्दोष जीवनेच्छाएँ किस प्रकार भोगवाद की भट्टी में झोंक दी जाती हैं, उनकी पीड़ा और मुक्तिकामी छटपटाहट को नागार्जुन ने गहरी आत्मीयता से उकेरा है। साथ ही, नागार्जुन यहाँ उस दृष्टि को प्रस्थापित करते हैं जो स्त्री की सामाजिक भूमिका और मानवीय गरिमा के प्रति सचेत है। Narak ki rachna jin jivan-sthitiyon se hui hogi, nagarjun ka ye upanyas unhin ke shabdankan ka parinam hai. Ek hi makan mein rahnevale chhah kirayedaron ki jivancharya par kendrit ye upanyas hamare ‘vikasman nagar-jivan ke jis samajik yatharth ki parten kholta hai, prkarantar se vah samuche bhartiy jivan ka yatharth hai, kyonki stri ke prati padarthvadi nazariye ki kahin koi kami nahin. Aarthik abhavon mein pisti anekanek nirdosh jivnechchhayen kis prkar bhogvad ki bhatti mein jhonk di jati hain, unki pida aur muktikami chhataptahat ko nagarjun ne gahri aatmiyta se ukera hai. Saath hi, nagarjun yahan us drishti ko prasthapit karte hain jo stri ki samajik bhumika aur manviy garima ke prati sachet hai.