BackBack
-11%

Kuchh Ishq Kiya Kuchh Kaam Kiya

Rs. 395 Rs. 352

सिनेमा और थिएटर के अन्तरिक्ष में विधाओं के आर-पार उड़नेवाले धूमकेतु कलाकार पीयूष मिश्रा यहाँ, इस जिल्द के भीतर सिर्फ़ एक बेचैन शब्दकार के रूप में मौजूद हैं। ये कविताएँ उनके जज़्बे की पैदावार हैं जिन्हें उन्होंने अपनी कामयाबियों से भी कमाया है, नाकामियों से भी। हर अच्छी कविता की... Read More

Description

सिनेमा और थिएटर के अन्तरिक्ष में विधाओं के आर-पार उड़नेवाले धूमकेतु कलाकार पीयूष मिश्रा यहाँ, इस जिल्द के भीतर सिर्फ़ एक बेचैन शब्दकार के रूप में मौजूद हैं। ये कविताएँ उनके जज़्बे की पैदावार हैं जिन्हें उन्होंने अपनी कामयाबियों से भी कमाया है, नाकामियों से भी। हर अच्छी कविता की तरह ये कविताएँ भी अपनी बात ख़ुद कहने की क़ायल हैं, फिर भी जो ख़ास तौर पर सुनने लायक़ है वह है इनकी बेचैनी जो इनके कंटेंट से लेकर फ़ार्म तक एक ही रचाव के साथ बिंधी है।
दूसरी ध्यान रखने लायक़ बात ये कि इनमें से कोई कविता अब तक न मंच पर उतरी है, न परदे पर। यानी यह सिर्फ़ और सिर्फ़ कवि-शायर पीयूष मिश्रा की किताब है। Sinema aur thiyetar ke antriksh mein vidhaon ke aar-par udnevale dhumketu kalakar piyush mishra yahan, is jild ke bhitar sirf ek bechain shabdkar ke rup mein maujud hain. Ye kavitayen unke jazbe ki paidavar hain jinhen unhonne apni kamyabiyon se bhi kamaya hai, nakamiyon se bhi. Har achchhi kavita ki tarah ye kavitayen bhi apni baat khud kahne ki qayal hain, phir bhi jo khas taur par sunne layaq hai vah hai inki bechaini jo inke kantent se lekar farm tak ek hi rachav ke saath bindhi hai. Dusri dhyan rakhne layaq baat ye ki inmen se koi kavita ab tak na manch par utri hai, na parde par. Yani ye sirf aur sirf kavi-shayar piyush mishra ki kitab hai.