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KUCH ADHURI BAATAIN MANN KI

Rs. 195.00

इन कविताओं को पढ़ें तो ऐसा महसूस होता है कि वो पल की कविता है, जिसे मनीष एहसास बना कर प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके अंदर का जो एकालाप और संवाद है, वो कभी पूरा न हो और इसी तरह वह हु सभी तक पहुँचता रहे। - डॉ। कुमार विश्वास... Read More

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Description
इन कविताओं को पढ़ें तो ऐसा महसूस होता है कि वो पल की कविता है, जिसे मनीष एहसास बना कर प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके अंदर का जो एकालाप और संवाद है, वो कभी पूरा न हो और इसी तरह वह हु सभी तक पहुँचता रहे। - डॉ। कुमार विश्वास जब अनुभव बात करता है, जब जिज्ञासा शब्द रूप लेती है, जब दर्द आईना देखता है और जब जिंदगी मुस्कुराकर हर चुनौती को स्वीकार करती है तब सिलसिला शुरू होता है मन की उलझनों का और ये उलझनें जब कविमन की हथेलियों पे रख सहलाई जाती हैं, तब बनती हैं ''कुछ अधूरी बातें मन की...'