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Khiraki Khol Do

Rs. 300 Rs. 267

‘खिड़की खोल दो’ में वर्षा दास के चार नाटक संकलित हैं। इन चारों नाटकों में उन्होंने मानव-जीवन को अलग-अलग पहलुओं से समझने का प्रयास किया है। संग्रह का पहला नाटक ‘नहीं कभी नहीं’ एक स्वतंत्रचेता स्त्री को केन्द्र में रखकर चलता है जिसे नाटक में एक अपेक्षाकृत दुर्बलमना पुरुष के... Read More

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Description

‘खिड़की खोल दो’ में वर्षा दास के चार नाटक संकलित हैं। इन चारों नाटकों में उन्होंने मानव-जीवन को अलग-अलग पहलुओं से समझने का प्रयास किया है। संग्रह का पहला नाटक ‘नहीं कभी नहीं’ एक स्वतंत्रचेता स्त्री को केन्द्र में रखकर चलता है जिसे नाटक में एक अपेक्षाकृत दुर्बलमना पुरुष के बरक्स उभारा गया है। 'मैं कौन हूँ' दो चोरों की कहानी है जो एक रात चोरी करने निकलते हैं तो इत्तेफ़ाक़न उनका सामना जीवन के कुछ ऐसे पक्षों से होता है जो उन्हें अपने बारे में नए सिरे से सोचने पर बाध्य कर देते हैं। आम आदमी की ज़िन्दगी से जुड़े दु:ख उन्हें बदल देते हैं। 'खिड़की खोल दो' में एक किशोरी अपने परिवार में पहली बार उन परम्पराओं को चुनौती देती है जिन्हें हर परिवार में स्त्री के व्यक्तित्व के दमन के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है और अन्तत: अपनी बात मनवा लेती है। 'सपना' संग्रह का पूर्णकालिक नाटक है जिसमें जीवन के और भी जटिल हालात को उकेरते हुए नाटककार ने एक बड़े सपने की तरफ़ इशारा किया है। ‘khidki khol do’ mein varsha daas ke char natak sanklit hain. In charon natkon mein unhonne manav-jivan ko alag-alag pahaluon se samajhne ka pryas kiya hai. Sangrah ka pahla natak ‘nahin kabhi nahin’ ek svtantrcheta stri ko kendr mein rakhkar chalta hai jise natak mein ek apekshakrit durbalamna purush ke baraks ubhara gaya hai. Main kaun hun do choron ki kahani hai jo ek raat chori karne nikalte hain to ittefaqan unka samna jivan ke kuchh aise pakshon se hota hai jo unhen apne bare mein ne sire se sochne par badhya kar dete hain. Aam aadmi ki zindagi se jude du:kha unhen badal dete hain. Khidki khol do mein ek kishori apne parivar mein pahli baar un parampraon ko chunauti deti hai jinhen har parivar mein stri ke vyaktitv ke daman ke liye istemal kiya jata raha hai aur antat: apni baat manva leti hai. Sapna sangrah ka purnkalik natak hai jismen jivan ke aur bhi jatil halat ko ukerte hue natakkar ne ek bade sapne ki taraf ishara kiya hai.