BackBack
-11%

Kattarata Jitegi Ya Udarata

Rs. 250 Rs. 223

यह पुस्तक भारतीय राजनीति और समाज को पिछले दो दशकों से मथनेवाली साम्प्रदायिकता की परिघटना को समझने और उसके मुक़ाबले की प्रेरणा और सम्यक् समझ विकसित करने के उद्देश्य से लिखी गई है। चार खंडों—वाजपेयी (अटल बिहारी), संघ सम्प्रदाय, जॉर्ज फर्नांडीज, गुराज—में विभक्त इस पुस्तक में साम्प्रदायिकता के चलते पैदा... Read More

BlackBlack
Description

यह पुस्तक भारतीय राजनीति और समाज को पिछले दो दशकों से मथनेवाली साम्प्रदायिकता की परिघटना को समझने और उसके मुक़ाबले की प्रेरणा और सम्यक् समझ विकसित करने के उद्देश्य से लिखी गई है। चार खंडों—वाजपेयी (अटल बिहारी), संघ सम्प्रदाय, जॉर्ज फर्नांडीज, गुराज—में विभक्त इस पुस्तक में साम्प्रदायिकता के चलते पैदा होनेवाली कट्टरता, संकीर्णता और फासीवादी प्रवृत्तियों और उन्हें अंजाम देने में भूमिका निभानेवाले नेताओं, संगठनों, शक्तियों आदि का घटनात्मक ब्यौरों सहित विवेचन किया गया है। इसमें मुख्यतः साम्प्रदायिकता के राष्ट्रीय जीवन के सामाजिक-सांस्कृतिक-शैक्षिक-अकादमिक आयामों पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों/दुष्परिणामों की भी शिनाख़्त और आकलन किया गया है। साम्प्रदायिकता की विचारधारा भूमंडलीकरण की विचारधारा के साथ मिलकर देश की आर्थिक और राजनैतिक सम्प्रभुता पर गहरी चोट कर रही है। पुस्तक में दोनों के गठजोड़ का उद्घाटन करते हुए, उसके चलते दरपेश नवसाम्राज्यवादी ख़तरे के प्रति आगाह किया गया है।
पुस्तक की विषयवस्तु साम्प्रदायिकता और उससे होनेवाले बिगाड़ को चिन्हित करने तक सीमित नहीं है। इसमें धर्मनिरपेक्षता, उदारता, लोकतंत्र और समाजवाद की विचारधारा के पक्ष में लगातार जिरह की गई है। इस रूप में यह सरोकारधर्मी और हस्तक्षेपकारी लेखन का सशक्त उदाहरण है।
भाषा की स्पष्टता और शैली की रोचकता पुस्तक को सामान्य पाठकों के लिए पठनीय बनाती है। Ye pustak bhartiy rajniti aur samaj ko pichhle do dashkon se mathnevali samprdayikta ki parighatna ko samajhne aur uske muqable ki prerna aur samyak samajh viksit karne ke uddeshya se likhi gai hai. Char khandon—vajpeyi (atal bihari), sangh samprday, jaurj pharnandij, guraj—men vibhakt is pustak mein samprdayikta ke chalte paida honevali kattarta, sankirnta aur phasivadi prvrittiyon aur unhen anjam dene mein bhumika nibhanevale netaon, sangathnon, shaktiyon aadi ka ghatnatmak byauron sahit vivechan kiya gaya hai. Ismen mukhyatः samprdayikta ke rashtriy jivan ke samajik-sanskritik-shaikshik-akadmik aayamon par padnevale dushprbhavon/dushparinamon ki bhi shinakht aur aaklan kiya gaya hai. Samprdayikta ki vichardhara bhumandlikran ki vichardhara ke saath milkar desh ki aarthik aur rajanaitik samprabhuta par gahri chot kar rahi hai. Pustak mein donon ke gathjod ka udghatan karte hue, uske chalte darpesh navsamrajyvadi khatre ke prati aagah kiya gaya hai. Pustak ki vishayvastu samprdayikta aur usse honevale bigad ko chinhit karne tak simit nahin hai. Ismen dharmanirpekshta, udarta, loktantr aur samajvad ki vichardhara ke paksh mein lagatar jirah ki gai hai. Is rup mein ye sarokardharmi aur hastakshepkari lekhan ka sashakt udahran hai.
Bhasha ki spashtta aur shaili ki rochakta pustak ko samanya pathkon ke liye pathniy banati hai.