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Kam Se Kam

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ऐसे दौर में जब लोकतन्त्र में कई गैर लोकतान्त्रिक तरीकों से असहमति को दबाये जाने का एक सुनियोजित अभियान ही चल रहा है, तब अशोक वाजपेयी उन सार्वजनिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों में से हैं जो कविता, लेखन, वक्तव्य और कर्म के अनेक स्तरों पर असहमति को विन्यस्त और मुखर... Read More

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Description

ऐसे दौर में जब लोकतन्त्र में कई गैर लोकतान्त्रिक तरीकों से असहमति को दबाये जाने का एक सुनियोजित अभियान ही चल रहा है, तब अशोक वाजपेयी उन सार्वजनिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों में से हैं जो कविता, लेखन, वक्तव्य और कर्म के अनेक स्तरों पर असहमति को विन्यस्त और मुखर कर रहे हैं। तरह-तरह से डराई जा रही व्यवस्था में वे निडर रहकर अपनी बात कहते हैं। वे उन लोगों में से हैं जो अन्त:करण के आयतन को संक्षिप्त होने से लगातार बचाने का अथक यत्न करते रहे हैं।
‘कम से कम’ की कविताएँ ज़्यादा से ज़्यादा मानवीय बने रहने का अभ्यास हैं : वे इसका साक्ष्य हैं कि कठिन से कठिन समय में कविता मनुष्य बने रहने की सम्भावना की जगह होती है। Aise daur mein jab loktantr mein kai gair loktantrik tarikon se asahamati ko dabaye jane ka ek suniyojit abhiyan hi chal raha hai, tab ashok vajpeyi un sarvajnik rup se sakriy vyaktiyon mein se hain jo kavita, lekhan, vaktavya aur karm ke anek stron par asahamati ko vinyast aur mukhar kar rahe hain. Tarah-tarah se darai ja rahi vyvastha mein ve nidar rahkar apni baat kahte hain. Ve un logon mein se hain jo ant:karan ke aaytan ko sankshipt hone se lagatar bachane ka athak yatn karte rahe hain. ‘kam se kam’ ki kavitayen zyada se zyada manviy bane rahne ka abhyas hain : ve iska sakshya hain ki kathin se kathin samay mein kavita manushya bane rahne ki sambhavna ki jagah hoti hai.