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Kal Ki Thakaan

Pavan Karan

Rs. 195.00

सुपरिचित कवि पवन करण की ये नयी कविताएँ अपनी अनेक भंगिमाओं के साथ समकालीन समय की राजनीति, व्यवस्था-तन्त्र, नैतिक स्थापनाओं और मूल्य-प्रतिमानों पर सवाल उठाती हैं। वर्चस्व, हिंसा, दमन, कलह और असुरक्षा की स्थितियों के बीच इन कविताओं में अनुभव-जगत् की एक सतत बेचैनी, उद्वेलन, क्लेश और प्रश्नाकुलता का ताना-बाना... Read More

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Description
सुपरिचित कवि पवन करण की ये नयी कविताएँ अपनी अनेक भंगिमाओं के साथ समकालीन समय की राजनीति, व्यवस्था-तन्त्र, नैतिक स्थापनाओं और मूल्य-प्रतिमानों पर सवाल उठाती हैं। वर्चस्व, हिंसा, दमन, कलह और असुरक्षा की स्थितियों के बीच इन कविताओं में अनुभव-जगत् की एक सतत बेचैनी, उद्वेलन, क्लेश और प्रश्नाकुलता का ताना-बाना दिखायी देता है। ये कविताएँ एक दहकते हुए समय के ताप को झेलती हुई सामान्य मान लिए गये रोज़मर्रा में उन बहुत सारे अँधेरे, सुनसान, उपेक्षित, छूटे हुए, गुमनाम इलाकों में गयी हैं जहाँ समय बहु-स्तरीय है, कई बार अबूझ है और अनुत्तरित है।