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अशोक वाजपेयी की 2009 से 2012 के दौरान लिखी गई कविताओं का यह संग्रह फिर उनकी अथक जिजीविषा, सयानी और संयत परिवर्तनशीलता, कविता तथा शब्द की सम्भावना और सीमा को स्पष्टता और निर्भीकता से अंकित करने का सशक्त साक्ष्य है। उनका अदम्य जीवनोल्लास और उतना ही उनके अन्तर में बसा... Read More

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Description

अशोक वाजपेयी की 2009 से 2012 के दौरान लिखी गई कविताओं का यह संग्रह फिर उनकी अथक जिजीविषा, सयानी और संयत परिवर्तनशीलता, कविता तथा शब्द की सम्भावना और सीमा को स्पष्टता और निर्भीकता से अंकित करने का सशक्त साक्ष्य है। उनका अदम्य जीवनोल्लास और उतना ही उनके अन्तर में बसा अवसाद फिर शब्द-प्रगट है।
वे अपनी लगभग अकेली और अद्वितीय राह नहीं छोड़ते। उस पर आत्मविश्वास से चलते हुए वे कई अप्रत्याशित मानवीय अभिप्राय और दृश्य उकेरते-खोजते हैं। हमारे समय में अन्तःकरण की विफलता, नागरिकों के लहू-रिसते घाव, सदियों से हिलगी हताश प्रार्थनाएँ, अपने निबिड़ शून्य में सिसकता ब्रह्मांड, चकाचौंध के फिसलन-भरे गलियारों में अनसुना विलाप आदि सभी उनकी कविता में दर्ज हैं पर यह उम्मीद भी कि कहीं कोई दरवाज़ा खुलता है। यह कविता नाउम्मीद अँधेरे से इनकार नहीं करती पर उम्मीद का दामन भी नहीं छोड़ती। यह संग्रह एक वरिष्ठ कवि की एक अधसदी से लम्बी कविता-यात्रा का एक नया और भरोसेमन्द मुकाम है। Ashok vajpeyi ki 2009 se 2012 ke dauran likhi gai kavitaon ka ye sangrah phir unki athak jijivisha, sayani aur sanyat parivartanshilta, kavita tatha shabd ki sambhavna aur sima ko spashtta aur nirbhikta se ankit karne ka sashakt sakshya hai. Unka adamya jivnollas aur utna hi unke antar mein basa avsad phir shabd-prgat hai. Ve apni lagbhag akeli aur advitiy raah nahin chhodte. Us par aatmvishvas se chalte hue ve kai apratyashit manviy abhipray aur drishya ukerte-khojte hain. Hamare samay mein antःkaran ki viphalta, nagarikon ke lahu-riste ghav, sadiyon se hilgi hatash prarthnayen, apne nibid shunya mein sisakta brahmand, chakachaundh ke phislan-bhare galiyaron mein anasuna vilap aadi sabhi unki kavita mein darj hain par ye ummid bhi ki kahin koi darvaza khulta hai. Ye kavita naummid andhere se inkar nahin karti par ummid ka daman bhi nahin chhodti. Ye sangrah ek varishth kavi ki ek adhasdi se lambi kavita-yatra ka ek naya aur bharosemand mukam hai.