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Kahaniyan Rishton Ki : Prem

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प्रेम एक बहुआयामी और छलिया शब्द! अपना ही विरोधी! आह्लादकारी और यातनादायी दोनों रहा है संसार के लिए यह शब्द। प्रेम और समाज दो विपरीत ध्रुव हैं और उनके बीच खड़ा है, दोनों को सहेजता मनुष्य। हम सबका जीवन ऐसी प्रेम कहानी/कहानियाँ होता है जिसका/जिनके क्लाइमेक्स अज्ञात या अन्तविहीन होते... Read More

Description

प्रेम एक बहुआयामी और छलिया शब्द! अपना ही विरोधी! आह्लादकारी और यातनादायी दोनों रहा है संसार के लिए यह शब्द। प्रेम और समाज दो विपरीत ध्रुव हैं और उनके बीच खड़ा है, दोनों को सहेजता मनुष्य। हम सबका जीवन ऐसी प्रेम कहानी/कहानियाँ होता है जिसका/जिनके क्लाइमेक्स अज्ञात या अन्तविहीन होते हैं। यह संकलन उन ख़ास कहानियों को चुनकर तैयार किया गया है, जिनमें प्रेम प्रखरता से उपस्थित है। वही प्रेम जो उबरने में नहीं, डूबने में सार पाता है...अपने प्रिय को खोकर प्रेम को पाने का गुमान रखने वाले साधारण, सिरफेरे चरित्रों की असाधारण कहानियाँ। Prem ek bahuayami aur chhaliya shabd! apna hi virodhi! aahladkari aur yatnadayi donon raha hai sansar ke liye ye shabd. Prem aur samaj do viprit dhruv hain aur unke bich khada hai, donon ko sahejta manushya. Hum sabka jivan aisi prem kahani/kahaniyan hota hai jiska/jinke klaimeks agyat ya antavihin hote hain. Ye sanklan un khas kahaniyon ko chunkar taiyar kiya gaya hai, jinmen prem prakharta se upasthit hai. Vahi prem jo ubarne mein nahin, dubne mein saar pata hai. . . Apne priy ko khokar prem ko pane ka guman rakhne vale sadharan, sirphere charitron ki asadharan kahaniyan.