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Kahaniyan Rishton Ki : Maa

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माँ यानी दुनिया से पहली पहचान, पहला रिश्ता। एक ऐसा रिश्ता जो जन्म के पहले से ही शुरू हो जाता है। बाद में सन्तान जैसे-जैसे बड़ी होने लगती है, उसकी दुनिया का विस्तार होने लगता है, उसके जीवन में माँ की केन्द्रीयता ख़त्म हो जाती है पर माँ के समूचे... Read More

Description

माँ यानी दुनिया से पहली पहचान, पहला रिश्ता। एक ऐसा रिश्ता जो जन्म के पहले से ही शुरू हो जाता है। बाद में सन्तान जैसे-जैसे बड़ी होने लगती है, उसकी दुनिया का विस्तार होने लगता है, उसके जीवन में माँ की केन्द्रीयता ख़त्म हो जाती है पर माँ के समूचे व्यक्तित्व और सद् भावना के केन्द्र में उसकी सन्तान ही रहती है। इस संकलन में लगभग सभी महत्त्वपूर्ण कहानियों को चयनित किया गया है, जिससे ‘माँ’ का कोई भी जाना-अनजाना चेहरा छूट न सके। यक़ीनन इसे पढ़ते हुए पाठकों की अपने जीवन से जुड़ी बहुत सारी छवियाँ और स्मृतियाँ कुछ और चटख होंगी। Man yani duniya se pahli pahchan, pahla rishta. Ek aisa rishta jo janm ke pahle se hi shuru ho jata hai. Baad mein santan jaise-jaise badi hone lagti hai, uski duniya ka vistar hone lagta hai, uske jivan mein man ki kendriyta khatm ho jati hai par man ke samuche vyaktitv aur sad bhavna ke kendr mein uski santan hi rahti hai. Is sanklan mein lagbhag sabhi mahattvpurn kahaniyon ko chaynit kiya gaya hai, jisse ‘man’ ka koi bhi jana-anjana chehra chhut na sake. Yaqinan ise padhte hue pathkon ki apne jivan se judi bahut sari chhaviyan aur smritiyan kuchh aur chatakh hongi.