BackBack
-11%

Jyamiti Ki Kahani

Rs. 150 Rs. 134

विज्ञान की शिक्षा में ज्यामिति या रेखागणित के अध्ययन का क्या महत्त्व है, इसे सभी जानते हैं। महान आइंस्टाइन ने तो यहाँ तक कहा है कि इस विश्व के भौतिक गुणधर्मों को ज्यामिति के नियमों से ही भली-भाँति समझा जा सकता है। स्कूलों में ज्यामिति पढ़ाई जाती है, पर यह... Read More

BlackBlack
Vendor: Rajkamal Categories: Rajkamal Prakashan Books Tags: Science
Description

विज्ञान की शिक्षा में ज्यामिति या रेखागणित के अध्ययन का क्या महत्त्व है, इसे सभी जानते हैं। महान आइंस्टाइन ने तो यहाँ तक कहा है कि इस विश्व के भौतिक गुणधर्मों को ज्यामिति के नियमों से ही भली-भाँति समझा जा सकता है।
स्कूलों में ज्यामिति पढ़ाई जाती है, पर यह नहीं बताया जाता कि ज्यामिति की शुरुआत कैसे हुई, किन देशों में हुई और किन विद्वानों ने इसके विकास में योग दिया। स्कूलों में पढ़ाई जानेवाली ज्यामिति मूलतः यूक्लिड की ज्यामिति है। अतः विद्यार्थियों को जानना चाहिए कि यूक्लिड कौन थे और उन्होंने ज्यामिति की रचना कैसे की। इससे ज्यामिति को समझने में आसानी होगी।
ज्यामिति के बहुत-से नियम यूक्लिड के पहले खोजे गए थे। यूक्लिड के पहले हमारे देश में भी ज्यामिति के अनेक नियम खोजे गए थे। ‘पाइथेगोर का प्रमेय’, न केवल भारत में, बल्कि चीन व बेबीलोन में भी खोजा गया था। इस पुस्तक में इन सब बातों की रोचक जानकारी दी गई है। साथ ही, पिछले क़रीब दो सौ साल में जो नई-नई ज्यामितियाँ खोजी गई हैं, उनका भी संक्षिप्त परिचय दिया गया है। Vigyan ki shiksha mein jyamiti ya rekhagnit ke adhyyan ka kya mahattv hai, ise sabhi jante hain. Mahan aainstain ne to yahan tak kaha hai ki is vishv ke bhautik gundharmon ko jyamiti ke niymon se hi bhali-bhanti samjha ja sakta hai. Skulon mein jyamiti padhai jati hai, par ye nahin bataya jata ki jyamiti ki shuruat kaise hui, kin deshon mein hui aur kin vidvanon ne iske vikas mein yog diya. Skulon mein padhai janevali jyamiti mulatः yuklid ki jyamiti hai. Atः vidyarthiyon ko janna chahiye ki yuklid kaun the aur unhonne jyamiti ki rachna kaise ki. Isse jyamiti ko samajhne mein aasani hogi.
Jyamiti ke bahut-se niyam yuklid ke pahle khoje ge the. Yuklid ke pahle hamare desh mein bhi jyamiti ke anek niyam khoje ge the. ‘paithegor ka prmey’, na keval bharat mein, balki chin va bebilon mein bhi khoja gaya tha. Is pustak mein in sab baton ki rochak jankari di gai hai. Saath hi, pichhle qarib do sau saal mein jo nai-nai jyamitiyan khoji gai hain, unka bhi sankshipt parichay diya gaya hai.