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Juloos

Phanishwarnath Renu

Rs. 495 Rs. 441

Rajkamal Prakashan

फणीश्वरनाथ रेणु का सम्पूर्ण साहित्य राजनीति की मज़बूत बुनियाद पर स्थित है। उन्होंने सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका को कभी राजनीति से कमतर नहीं माना। ‘मैला आँचल’ और 'परती परिकथा’ की भाँति 'जुलूस’ उपन्यास पूर्णिया ज़‍िले में नए बस रहे एक गाँव नबीनगर और पूर्व-प्रतिष्ठित गोडियर गाँव के पारस्परिक... Read More

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Description

फणीश्वरनाथ रेणु का सम्पूर्ण साहित्य राजनीति की मज़बूत बुनियाद पर स्थित है। उन्होंने सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका को कभी राजनीति से कमतर नहीं माना। ‘मैला आँचल’ और 'परती परिकथा’ की भाँति 'जुलूस’ उपन्यास पूर्णिया ज़‍िले में नए बस रहे एक गाँव नबीनगर और पूर्व-प्रतिष्ठित गोडियर गाँव के पारस्परिक सम्बन्धों और संघर्षों की कथा है।
इस उपन्यास में ‘रेणु’ ने स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् होनेवाले दंगों के कारण पूर्वी बंगाल से विस्थापित होकर भारत आए लोगों के दु:ख-दर्द की गाथा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। साथ ही उन्होंने यह भी दिखाना चाहा है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के चौदह-पन्द्रह साल बाद भी गाँव में कितना अन्धकार, अन्धविश्वास, ग़रीबी और भुखमरी आदि व्याप्त है और लोग अनेक जटिलताओं में फँसे हुए हैं। एक संघर्षधर्मी सामाजिक चेतना तथा सामन्ती मूल्यों एवं लोगों के प्रति प्रतिरोध की भावना 'रेणु' के लगभग सभी उपन्यासों में मिलती है। ऐसा इस उपन्यास में भी देखने को मिलेगा। साथ ही माटी और मानुष के लगाव की इस रागात्मक कथा में पाठक को पवित्रा जैसी अविस्मरणीय किरदार देखने को मिलेगी। Phanishvarnath renu ka sampurn sahitya rajniti ki mazbut buniyad par sthit hai. Unhonne samajik badlav mein sahitya ki bhumika ko kabhi rajniti se kamtar nahin mana. ‘maila aanchal’ aur parti pariktha’ ki bhanti julus’ upanyas purniya za‍ile mein ne bas rahe ek ganv nabingar aur purv-prtishthit godiyar ganv ke parasprik sambandhon aur sangharshon ki katha hai. Is upanyas mein ‘renu’ ne svtantrta-prapti ke pashchat honevale dangon ke karan purvi bangal se visthapit hokar bharat aae logon ke du:kha-dard ki gatha ko marmik dhang se prastut kiya hai. Saath hi unhonne ye bhi dikhana chaha hai ki svtantrta prapti ke chaudah-pandrah saal baad bhi ganv mein kitna andhkar, andhvishvas, garibi aur bhukhamri aadi vyapt hai aur log anek jatiltaon mein phanse hue hain. Ek sangharshdharmi samajik chetna tatha samanti mulyon evan logon ke prati pratirodh ki bhavna renu ke lagbhag sabhi upanyason mein milti hai. Aisa is upanyas mein bhi dekhne ko milega. Saath hi mati aur manush ke lagav ki is ragatmak katha mein pathak ko pavitra jaisi avismarniy kirdar dekhne ko milegi.