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Jeene Ke Bahaane

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प्रभाष जोशी ने ‘जीने के बहाने’ में अपने समय के चर्चित व्यक्तित्वों के चरित्र और विचार का दो टूक विश्लेषण किया है। जिन व्यक्तित्वों ने इतिहास की धारा को सही दिशा में ले जाने की कोशिश की है, प्रभाष जोशी ने ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के अवदान का रेखांकन किया है।... Read More

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Description

प्रभाष जोशी ने ‘जीने के बहाने’ में अपने समय के चर्चित व्यक्तित्वों के चरित्र और विचार का दो टूक विश्लेषण किया है। जिन व्यक्तित्वों ने इतिहास की धारा को सही दिशा में ले जाने की कोशिश की है, प्रभाष जोशी ने ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के अवदान का रेखांकन किया है। कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं जिन्होंने अपनी वैचारिक विसंगतियों से इतिहास के प्रवाह में गतिरोध पैदा करने का प्रयास किया है, प्रभाष जी ने उनकी ख़बर ली है।
प्रभाष जोशी लिखते हैं : “ये व्यक्तिचित्र नहीं हैं। जीवनियाँ भी नहीं हैं, और तो और, संस्मरण भी नहीं हैं। जैसे गांधी के साथ मेरे क्या संस्मरण हो सकते हैं। दिल्ली में जब नाथूराम गोडसे ने उनको गोली मारी तो मैं इन्दौर में दस बरस का था। माताराम कहती हैं कि उन्होंने मुझे गांधी जी को दिखाया था। तब वे हिन्दी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता करने इन्दौर आए थे। लेकिन तब मैं साल-भर का था और कहना कि उन्हें मैंने देखा, गप्प लगाना होगा। लेकिन इस पुस्तक की शुरुआत ही गांधी पर लिखे लेख से होती है। और तीन निबन्ध हैं जिन पर लिखा है, वे सार्वजनिक जीवन के लोग हैं।...जिन-जिन रूपों और तरीक़ों से कोई हमारे जीवन में जा सकता है, उन्हीं रूपों और तरीक़ों, में मैंने उनको जिया और याद रखा है। ये बहाने हैं जिनके कारण मैं जीता हूँ।”
पुस्तक में जिन व्यक्तित्वों पर प्रभाष जी ने लिखा है, वे जीवन और समाज के विविध क्षेत्रों के लोग हैं। उनमें कुछ अन्य प्रमुख नाम हैं : विनोबा, जेपी, ज्ञानी जैलसिंह, के.आर. नारायणन, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चन्द्रशेखर, नरसिंह राव, अटल बिहारी वाजपेयी, मधु लिमये, सोनिया गांधी, रामनाथ गोयनका, राहुल बारपुते, एस. मुलगावकर, रामविलास शर्मा, त्रिलोचन, गिरिजा कुमार माथुर, धर्मवीर भारती, हरिशंकर परसाई, वी.एस. नॉयपाल, अरुंधती राय, सत्यजित राय, लता मंगेशकर, जे.आर.डी. टाटा, राधाकृष्ण, सिद्धराज ढड्ढा, सी.के. नायडू, गावसकर, तेंदुलकर, नवरातिलोवा आदि। Prbhash joshi ne ‘jine ke bahane’ mein apne samay ke charchit vyaktitvon ke charitr aur vichar ka do tuk vishleshan kiya hai. Jin vyaktitvon ne itihas ki dhara ko sahi disha mein le jane ki koshish ki hai, prbhash joshi ne aise aitihasik vyaktitvon ke avdan ka rekhankan kiya hai. Kuchh vyaktitv aise hain jinhonne apni vaicharik visangatiyon se itihas ke prvah mein gatirodh paida karne ka pryas kiya hai, prbhash ji ne unki khabar li hai. Prbhash joshi likhte hain : “ye vyaktichitr nahin hain. Jivaniyan bhi nahin hain, aur to aur, sansmran bhi nahin hain. Jaise gandhi ke saath mere kya sansmran ho sakte hain. Dilli mein jab nathuram godse ne unko goli mari to main indaur mein das baras ka tha. Mataram kahti hain ki unhonne mujhe gandhi ji ko dikhaya tha. Tab ve hindi sahitya sammelan ki adhyakshta karne indaur aae the. Lekin tab main sal-bhar ka tha aur kahna ki unhen mainne dekha, gapp lagana hoga. Lekin is pustak ki shuruat hi gandhi par likhe lekh se hoti hai. Aur tin nibandh hain jin par likha hai, ve sarvajnik jivan ke log hain. . . . Jin-jin rupon aur tariqon se koi hamare jivan mein ja sakta hai, unhin rupon aur tariqon, mein mainne unko jiya aur yaad rakha hai. Ye bahane hain jinke karan main jita hun. ”
Pustak mein jin vyaktitvon par prbhash ji ne likha hai, ve jivan aur samaj ke vividh kshetron ke log hain. Unmen kuchh anya prmukh naam hain : vinoba, jepi, gyani jailsinh, ke. Aar. Naraynan, vishvnath prtap sinh, chandrshekhar, narsinh raav, atal bihari vajpeyi, madhu limye, soniya gandhi, ramnath goyanka, rahul barapute, es. Mulgavkar, ramavilas sharma, trilochan, girija kumar mathur, dharmvir bharti, harishankar parsai, vi. Es. Nauypal, arundhti raay, satyjit raay, lata mangeshkar, je. Aar. Di. Tata, radhakrishn, siddhraj dhaddha, si. Ke. Naydu, gavaskar, tendulkar, navratilova aadi.

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