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Jati Hi Poochho Sadhu Ki

Vijay Tendlukar Translated by Marathi to Hindi by Dr. Sunil Devdhar

Rs. 299.00

विजय तेंडुलकर के नाटक सामाजिक जड़ता और विकृतियों पर तीखा प्रहार करते हैं। यह नाटक हमारे समाज में सदियों से चली आ रही जाति व्यवस्था और उसके गहन दुष्प्रभाव पर करारा व्यंय करता है। यह विसंगति आज़ादी के इतने सालों बाद भी हमारे समाज में उपस्थित है। शिक्षा व्यवस्था भी... Read More

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Vendor: Vani Prakashan Categories: Vani Prakashan Books Tags: Play
Description
विजय तेंडुलकर के नाटक सामाजिक जड़ता और विकृतियों पर तीखा प्रहार करते हैं। यह नाटक हमारे समाज में सदियों से चली आ रही जाति व्यवस्था और उसके गहन दुष्प्रभाव पर करारा व्यंय करता है। यह विसंगति आज़ादी के इतने सालों बाद भी हमारे समाज में उपस्थित है। शिक्षा व्यवस्था भी मनुष्यों के मन में विभेद उत्पन्न करने वाली इन बेड़ियों को तोड़ पाने में असफल रही है। यह नाटक हमारी शिक्षा व्यवस्था की उस कमी की ओर भी संकेत करता है जो डिग्रीधारी युवा तो पैदा कर देती है, पर वह समाज की उन्नति के लिए सही अर्थों में अपना कोई रचनात्मक योगदान देने में अक्षम ही साबित होती है। ‘नो वेकेंसी' के इस भयावह समय में शिक्षा व्यवस्था ने बेरोजगार युवाओं की फौज खड़ी कर दी है। यह नाटक उसी प्रश्न से रूबरू कराता है और इस विकट समस्या पर विचार करने को बाध्य करता है।