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Janam Janam Junoon Mein Hum

Riyaz Latif

Rs. 199 Rs. 169

Rekhta

जनम-जनम जुनूँ में हम" रियाज़ लतीफ़ का तीसरा शेरी मजमूआ है। इससे पहले उनके दो शेरी मजमूए “हिन्दसा बे-ख़्वाब रातों का” और “अदम-तराश” मंज़र-ए-आम पर आ चुके हैं।  1990 के आस-पास अपनी पहचान बनाने वाले उर्दू शायरों में रियाज़ लतीफ़ नुमायाँ हैं।  एक ख़ास तख़्लीक़ी मिज़ाज, नादिर मौज़ूआत, और ग़ैर-रस्मी लहजे की बुनियाद पर उनकी... Read More

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Riyaz Latif

Janam Janam Junoon Mein Hum

Description
जनम-जनम जुनूँ में हम" रियाज़ लतीफ़ का तीसरा शेरी मजमू है। इससे पहले उनके दो शेरी मजमूए “हिन्दसा बे-ख़्वाब रातों का” और “अदम-तराश” मंज़र-ए-आम पर आ चुके हैं।  1990 के आस-पास अपनी पहचान बनाने वाले उर्दू शायरों में रियाज़ लतीफ़ नुमायाँ हैं।  एक ख़ास तख़्लीक़ी मिज़ाज, नादिर मौज़ूआत, और ग़ैर-रस्मी लहजे की बुनियाद पर उनकी शायरी बिल्कुल अलग पहचानी जाती है
जिसकी झलक पढ़ने वालों को इस इन्तिख़ाब में नज़र आएगी।