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Jab Shahar Hamara Sota Hai

Rs. 300 Rs. 267

राबर्ट वाइज़ द्वारा निर्देशित, आर्थर लॉरेंट्ज द्वारा लिखित, जेरोम डी. रॉबिंस द्वारा नृत्य-संयोजित, नियोनिद बार्नस्टीन द्वारा संगीत और स्टीवन सोंघीम द्वारा लिखे गए गीतों से सुसज्जित फ़िल्म ‘वेस्ट साइड स्टोरी’ सिर्फ़ अपने दस ऑस्कर अवाडर्स की भीड़ की वजह से ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि विलियम शेक्सपियर के ‘रोमियो एंड... Read More

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Description

राबर्ट वाइज़ द्वारा निर्देशित, आर्थर लॉरेंट्ज द्वारा लिखित, जेरोम डी. रॉबिंस द्वारा नृत्य-संयोजित, नियोनिद बार्नस्टीन द्वारा संगीत और स्टीवन सोंघीम द्वारा लिखे गए गीतों से सुसज्जित फ़िल्म ‘वेस्ट साइड स्टोरी’ सिर्फ़ अपने दस ऑस्कर अवाडर्स की भीड़ की वजह से ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि विलियम शेक्सपियर के ‘रोमियो एंड जूलियट’ से प्रेरित यह ब्राडवे म्यूजिकल क्लासिक कई मायनों में दुनिया के आधुनिक थिएटर इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है। ‘एक्ट-वन’ ने अपना अगला नाटक चुन लिया था जिसे नाटक से अधिक दुस्साहस कहना उचित होगा। ‘वेस्ट साइड स्टोरी’ का नया नामकरण हुआ...‘जब शहर हमारा सोता है’।
नाटक पढ़ा गया। फ़िल्म देखी गई। और गद्गद होने की प्रक्रिया से उबरने के बाद सर्वसम्मति से फ़ैसला हुआ कि अब इस स्क्रिप्ट को एक तरफ़ रख दिया जाए। हमारी स्क्रिप्ट हमारी होगी जिसमें हमारे चरित्र होंगे, हमारी सिचुएशंस होंगी, हमारे दृश्य होंगे, हमारे गीत और संगीत के साथ हमारा अपना हिन्दुस्तान होगा।
आज से चार सौ साल पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी के आगमन के परिणामों को भोगता हुआ हमारा ख़ूबसूरत मुल्क 1947 और 1984 को छूता हुआ आज जब गोधरा से एक क़दम आगे जाने की छटपटाहट से गुज़र रहा है, तो ‘शहर...’ के ज़िन्दा होने का अहसास पहले से भी ज़्यादा मुखर और प्रखर हो जाता है। Rabart vaiz dvara nirdeshit, aarthar laurentj dvara likhit, jerom di. Raubins dvara nritya-sanyojit, niyonid barnastin dvara sangit aur stivan songhim dvara likhe ge giton se susajjit film ‘vest said stori’ sirf apne das auskar avadars ki bhid ki vajah se hi prsiddh nahin hai, balki viliyam sheksapiyar ke ‘romiyo end juliyat’ se prerit ye bradve myujikal klasik kai maynon mein duniya ke aadhunik thiyetar itihas mein mil ka patthar mani jati hai. ‘ekt-van’ ne apna agla natak chun liya tha jise natak se adhik dussahas kahna uchit hoga. ‘vest said stori’ ka naya namakran hua. . . ‘jab shahar hamara sota hai’. Natak padha gaya. Film dekhi gai. Aur gadgad hone ki prakriya se ubarne ke baad sarvsammati se faisla hua ki ab is skript ko ek taraf rakh diya jaye. Hamari skript hamari hogi jismen hamare charitr honge, hamari sichueshans hongi, hamare drishya honge, hamare git aur sangit ke saath hamara apna hindustan hoga.
Aaj se char sau saal pahle iist indiya kampni ke aagman ke parinamon ko bhogta hua hamara khubsurat mulk 1947 aur 1984 ko chhuta hua aaj jab godhra se ek qadam aage jane ki chhataptahat se guzar raha hai, to ‘shahar. . . ’ ke zinda hone ka ahsas pahle se bhi zyada mukhar aur prkhar ho jata hai.