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Hindi Aalochana (Hardbound)

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प्रस्तुत पुस्तक में हिन्दी के विपुल और विविध आलोचना-साहित्य का विकास-क्रम दिखाते हुए उसका विस्तृत विवेचन किया गया है। लेखक ने कोशिश की है कि आलोचना-साहित्य के मूल स्रोतों को देखकर ही उसके विषय में कुछ लिखा जाए। यह अध्ययन प्रधानत: शुक्ल और प्रमुख शुक्लोत्तर समीक्षकों पर ही आधारित है।... Read More

Description

प्रस्तुत पुस्तक में हिन्दी के विपुल और विविध आलोचना-साहित्य का विकास-क्रम दिखाते हुए उसका विस्तृत विवेचन किया गया है। लेखक ने कोशिश की है कि आलोचना-साहित्य के मूल स्रोतों को देखकर ही उसके विषय में कुछ लिखा जाए।
यह अध्ययन प्रधानत: शुक्ल और प्रमुख शुक्लोत्तर समीक्षकों पर ही आधारित है। इसमें पं. रामचन्द्र शुक्ल के आलोचक की शक्ति को समझने का उद्यम किया गया है और उन्होंने आलोचक बनने की जो गम्भीर साधना की थी, उस पर प्रकाश डाला गया है। पं. नन्ददुलारे वाजपेयी, पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी तथा डॉ. नगेन्द्र की आलोचनात्मक कृतियों का जायज़ा लिया गया है और प्रगतिशील समीक्षकों में डॉ. रामविलास शर्मा तथा
डॉ. नामवर सिंह के योगदान पर विचार किया गया है।
पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें भारतेन्दु युग और द्विवेदी युग की पत्र-पत्रिकाओं और छायावादी कवियों के आलोचनात्मक विचारों के भी महत्त्व को ठीक ढंग से आँकने का प्रयास है। कुल मिलाकर, पुस्तक में हिन्दी आलोचना को नए ढंग से देखा-परखा गया है। Prastut pustak mein hindi ke vipul aur vividh aalochna-sahitya ka vikas-kram dikhate hue uska vistrit vivechan kiya gaya hai. Lekhak ne koshish ki hai ki aalochna-sahitya ke mul sroton ko dekhkar hi uske vishay mein kuchh likha jaye. Ye adhyyan prdhanat: shukl aur prmukh shuklottar samikshkon par hi aadharit hai. Ismen pan. Ramchandr shukl ke aalochak ki shakti ko samajhne ka udyam kiya gaya hai aur unhonne aalochak banne ki jo gambhir sadhna ki thi, us par prkash dala gaya hai. Pan. Nandadulare vajpeyi, pan. Hajariprsad dvivedi tatha dau. Nagendr ki aalochnatmak kritiyon ka jayza liya gaya hai aur pragatishil samikshkon mein dau. Ramavilas sharma tatha
Dau. Namvar sinh ke yogdan par vichar kiya gaya hai.
Pustak ki visheshta ye hai ki ismen bhartendu yug aur dvivedi yug ki patr-patrikaon aur chhayavadi kaviyon ke aalochnatmak vicharon ke bhi mahattv ko thik dhang se aankane ka pryas hai. Kul milakar, pustak mein hindi aalochna ko ne dhang se dekha-parkha gaya hai.