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Hadapada Appanna-Lingam

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ध्यान करना चाहूँ तो क्या ध्यान करूँ। मन तेजोहीन धुँधला पड़ गया था, तन शून्य हो गया था। कायक गुण गल चुका। देह से अहं मिट गया था। अपने आपसे प्रकाश में झूमते मैं सुखी बनी अप्पण्णाप्रिय चन्नबसवण्णा॥ मन याद कर रहा है। बुरी विषय वासना की ओर मन बहक... Read More

Description

ध्यान करना चाहूँ तो क्या ध्यान करूँ।
मन तेजोहीन धुँधला पड़ गया था, तन शून्य हो गया था।
कायक गुण गल चुका। देह से अहं मिट गया था।
अपने आपसे प्रकाश में झूमते मैं सुखी बनी
अप्पण्णाप्रिय चन्नबसवण्णा॥
मन याद कर रहा है।
बुरी विषय वासना की ओर मन बहक रहा है।
डाली की चोटी की ओर जा रहा है मन
मन किसी भी नियम में बँधता नहीं,
छोड़ देने पर मन जाता भी नहीं।
अपनी इच्छा पर मनमानी करते मन को नियम में बाँधकर
लक्ष्य में स्थिर करके शून्य में विहरनेवाले
शरणों के चरणों में मैं समा रही
अप्पण्णाप्रिय चन्नबसवण्णा॥
—लिंगम्मा
घास-फूस-कचरा निकालकर स्वच्छ किए
हुए खेत में कूड़ा-करकट बोनेवाले पागलों की तरह
विषय-सुखों के झूठे भ्रम में लोलुप होकर
तकलीफ़ में पड़नेवाले मनुष्य कैसे जान सकते
महाघन गुरु के स्वरूप को?
मरण बाधा में पड़नेवाले आपको कैसे जान सकते हैं
बसवप्रिय कूडल चन्नबसवण्णा? ॥
भूख मिटाने अन्न स्वीकार करते हैं,
विषय के मोह में झूठ बोलते हैं,
नए-नए व्यसन में पड़कर
भस्म धारण करके सारा विश्व घूमते हैं।
इस मिथ्या को छोड़कर, माया के धुँधलेपन को दूर किए बिना
नहीं समा सकता हमारा बसवप्रिय कूडल चन्नबसवण्णा॥
—अप्पण्‍णा Dhyan karna chahun to kya dhyan karun. Man tejohin dhundhala pad gaya tha, tan shunya ho gaya tha.
Kayak gun gal chuka. Deh se ahan mit gaya tha.
Apne aapse prkash mein jhumte main sukhi bani
Appannapriy channabasvanna॥
Man yaad kar raha hai.
Buri vishay vasna ki or man bahak raha hai.
Dali ki choti ki or ja raha hai man
Man kisi bhi niyam mein bandhata nahin,
Chhod dene par man jata bhi nahin.
Apni ichchha par manmani karte man ko niyam mein bandhakar
Lakshya mein sthir karke shunya mein viharnevale
Sharnon ke charnon mein main sama rahi
Appannapriy channabasvanna॥
—lingamma
Ghas-phus-kachra nikalkar svachchh kiye
Hue khet mein kuda-karkat bonevale paglon ki tarah
Vishay-sukhon ke jhuthe bhram mein lolup hokar
Taklif mein padnevale manushya kaise jaan sakte
Mahaghan guru ke svrup ko?
Maran badha mein padnevale aapko kaise jaan sakte hain
Basvapriy kudal channabasvanna? ॥
Bhukh mitane ann svikar karte hain,
Vishay ke moh mein jhuth bolte hain,
Ne-ne vysan mein padkar
Bhasm dharan karke sara vishv ghumte hain.
Is mithya ko chhodkar, maya ke dhundhlepan ko dur kiye bina
Nahin sama sakta hamara basvapriy kudal channabasvanna॥
—appan‍na