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Grees Puran Katha Kosh

Kamal Naseem

Rs. 1,895

Rajkamal Prakashan

एशिया और पश्चिमी देशों के सारे साहित्य-संस्कृति की रीढ़ हैं भारतीय और ग्रीस-पुराण-कथाएँ। अपोलो, हेराक्लीज़ ऑरोरा, ऐफ्रॉडायटी ट्रॉय इत्यादि न जाने कितने देवी-देवता, वीर नायक-नायिकाएँ स्थान और घटनाएँ हैं, जिनके ज़िक्र अंग्रेज़ी और भारतीय साहित्य में प्रारम्भ से ही आने लगते हैं और आगे हर क्षेत्र में इनके सन्दर्भ मिलते... Read More

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Description

एशिया और पश्चिमी देशों के सारे साहित्य-संस्कृति की रीढ़ हैं भारतीय और ग्रीस-पुराण-कथाएँ। अपोलो, हेराक्लीज़ ऑरोरा, ऐफ्रॉडायटी ट्रॉय इत्यादि न जाने कितने देवी-देवता, वीर नायक-नायिकाएँ स्थान और घटनाएँ हैं, जिनके ज़िक्र अंग्रेज़ी और भारतीय साहित्य में प्रारम्भ से ही आने लगते हैं और आगे हर क्षेत्र में इनके सन्दर्भ मिलते हैं। कमल नसीम ने बेहद ही परिश्रम से इन परिचयात्मक कहानियों को वर्गीकृत किया और प्रामाणिक रूप से लिखा है।
यह अनोखा, विलक्षण सन्दर्भ-कोश एकदम नए ढंग से हमें इस उपयोगी, ज्ञानवर्धक और दिलचस्प सामग्री से परिचित कराता है। हज़ारों महाकाव्यों, काव्यों, नाटकों, फ़िल्मों इत्यादि की आधारभूत सामग्री की पृष्ठभूमि खोलता है। इसमें हैं—देवी-देवता, वीर, पराक्रमी, चमत्कारी नायक, योद्धा, सुन्दर-कुरूप नायिकाएँ, घटनाएँ, घटना-स्थल, युद्ध और निर्माण, विजय-पराजय, स्वप्न और इतिहास, मनुष्य के आदिम और उदात्त रूप, सम्बन्धों के घिनौने और पूज्य धरातल।
ये कहानियाँ जितनी रोचक, रोमांचक, प्रतीकात्मक और ज्ञानवर्धक हैं, उतनी ही उपयोगी भी। पुस्तक में पीछे दी गई अनुक्रमणिका की सहायता से वांछित प्रसंगों का विस्तृत विवरण आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह ऐसा कोश है, जिसे न सिर्फ़ इतिहास के छात्र, प्राध्यापक वरन् सुधी पाठक भी पढ़ना और सँजोकर रखना चाहेंगे। Eshiya aur pashchimi deshon ke sare sahitya-sanskriti ki ridh hain bhartiy aur gris-puran-kathayen. Apolo, herakliz aurora, aiphraudayti trauy ityadi na jane kitne devi-devta, vir nayak-nayikayen sthan aur ghatnayen hain, jinke zikr angrezi aur bhartiy sahitya mein prarambh se hi aane lagte hain aur aage har kshetr mein inke sandarbh milte hain. Kamal nasim ne behad hi parishram se in parichyatmak kahaniyon ko vargikrit kiya aur pramanik rup se likha hai. Ye anokha, vilakshan sandarbh-kosh ekdam ne dhang se hamein is upyogi, gyanvardhak aur dilchasp samagri se parichit karata hai. Hazaron mahakavyon, kavyon, natkon, filmon ityadi ki aadharbhut samagri ki prishthbhumi kholta hai. Ismen hain—devi-devta, vir, parakrmi, chamatkari nayak, yoddha, sundar-kurup nayikayen, ghatnayen, ghatna-sthal, yuddh aur nirman, vijay-parajay, svapn aur itihas, manushya ke aadim aur udatt rup, sambandhon ke ghinaune aur pujya dharatal.
Ye kahaniyan jitni rochak, romanchak, prtikatmak aur gyanvardhak hain, utni hi upyogi bhi. Pustak mein pichhe di gai anukramanika ki sahayta se vanchhit prsangon ka vistrit vivran aasani se prapt kiya ja sakta hai. Ye aisa kosh hai, jise na sirf itihas ke chhatr, pradhyapak varan sudhi pathak bhi padhna aur sanjokar rakhna chahenge.