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Ghazal Ka Shor

Zafar Iqbal

Rs. 249.00 Rs. 199.00

Anout Book प्रस्तुत किताब रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम’ सिलसिले के तहत प्रकाशित प्रसिद्ध उर्दू शाइर ज़फर इक़बाल का ताज़ा काव्य-संग्रह है| ज़फर इक़बाल शाइरी आधुनिकतावादी शाइरी है और ग़ज़ल की एक नई शैली स्थापित करने के लिए जानी जाती है| जफर इकबाल की शाइरी प्रेम को अलौकिक के बजाय भौतिक और... Read More

Description

Anout Book

प्रस्तुत किताब रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम’ सिलसिले के तहत प्रकाशित प्रसिद्ध उर्दू शाइर ज़फर इक़बाल का ताज़ा काव्य-संग्रह है| ज़फर इक़बाल शाइरी आधुनिकतावादी शाइरी है और ग़ज़ल की एक नई शैली स्थापित करने के लिए जानी जाती है| जफर इकबाल की शाइरी प्रेम को अलौकिक के बजाय भौतिक और वैज्ञानिक के रूप में स्थापित करती है। उन्हें एक नए लहजे और नई अवधारणा के कवि के रूप में जाना जाता है। उन्होंने क्लासिकी ग़ज़ल की मिट्टी को अपनी रचनात्मक प्रतिभा के चाक पर चढ़ा कर, अभिव्यक्ति और तकनीक के नए साँचे बनाए और एक नए भाव-संसार की संभावनाओं की ख़बर दी। यह किताब देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है| 

 

About Author

ज़फ़र इक़बाल का जन्म 1933 को लाहोर के शहर ओकाड़ा में हुआ। ज़फ़र इक़बाल आधुनिकतावादी उर्दू शाइ’री में, ग़ज़लकारी की एक नई शैली और परंपरा स्थापित करने वाले प्रमुखतम शाइ’र हैं, जिन्होंने ग़ज़ल को एक चुनौती के तौर पर धारण किया और इस आग के दरिया में से और भी रौशन हो कर निकले। उन्होंने क्लासिकी ग़ज़ल की मिट्टी को अपनी रचनात्मक प्रतिभा के चाक पर चढ़ा कर, अभिव्यक्ति और तकनीक के नए साँचे बनाए और एक नए भाव-संसार की संभावनाओं की ख़बर दी। भाषा की सरहदें फैलाने के प्रयत्न किए। शब्दों को उनके शब्दकोषीय और परिचित अर्थों से हटा कर, नए और अप्रत्याशित संदर्भों में साक्रिय करके एक नया अर्थ-बोध हासिल करने की कोशिश भी उनका एक महत्वपूर्ण योगदान है। ज़फ़र इक़बाल की एक बड़ी उपलब्धि ये भी है कि तमामतर प्रयोगवादी नएपन के बावजूद उनके शे’र कभी बेमज़ा नहीं होते और बार बार एक नए आश्चर्य-जगत की सैर कराते हैं।