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Ghav Karen Gambhir

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‘घाव करें गम्भीर’ शरद जोशी की व्यंग्यधर्मिता का एक अद्भुत आयाम है। एक उक्ति है ‘जहाँ काम आवै सुई, काह करै तरवारि।’ शरद जोशी लम्बे व्यंग्यालेख लिखने में जितने सिद्धहस्त हैं, उतनी ही निपुणता उन्हें ‘संक्षिप्त व्यंग्य’ लिखने में प्राप्त है। प्रस्तुत संग्रह में आकार की दृष्टि से ‘लघु व्यंग्य’... Read More

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Description

‘घाव करें गम्भीर’ शरद जोशी की व्यंग्यधर्मिता का एक अद्भुत आयाम है। एक उक्ति है ‘जहाँ काम आवै सुई, काह करै तरवारि।’ शरद जोशी लम्बे व्यंग्यालेख लिखने में जितने सिद्धहस्त हैं, उतनी ही निपुणता उन्हें ‘संक्षिप्त व्यंग्य’ लिखने में प्राप्त है। प्रस्तुत संग्रह में आकार की दृष्टि से ‘लघु व्यंग्य’ और ‘लघु कहानियाँ’ संगृहीत हैं। यह लेखक का शब्द संयम ही है कि उसने ‘गागर में सागर’ भरने का चमत्कार कर दिखाया है।
शरद जोशी के सरोकार प्रशस्त हैं। इन व्यंग्यों और लघु कहानियों में शिल्प की तीक्ष्णता सरोकारों को और पैना कर देती है। ‘जिसके हम मामा हैं’ में वे लिखते हैं, ‘आप प्रजातंत्र की गंगा में डुबकी लगाते हैं। बाहर निकलने पर देखते हैं कि वह शख़्स जो कल आपके चरण छूता था, आपका वोट लेकर ग़ायब हो गया। वोटों की पूरी पेटी लेकर भाग गया।’
‘घाव करें गम्भीर’ के व्यंग्य की धार दुहरी है। पाठक जहाँ परिवेश की विसंगतियों के प्रति सचेत होता है, वहीं अपने अन्तर्विरोधों के प्रति उसमें सजगता जाग्रत होती है। छोटे-छोटे अनुभव, लोककथाओं सरीखा स्वाद, व्यंजनाओं का समारोह और शिल्प की नवीनता प्रस्तुत पुस्तक की रेखांकित करने योग्य विशेषताएँ हैं।
शरद जोशी के असंख्य पाठकों के लिए एक उपहार है यह। ‘ghav karen gambhir’ sharad joshi ki vyangydharmita ka ek adbhut aayam hai. Ek ukti hai ‘jahan kaam aavai sui, kaah karai tarvari. ’ sharad joshi lambe vyangyalekh likhne mein jitne siddhhast hain, utni hi nipunta unhen ‘sankshipt vyangya’ likhne mein prapt hai. Prastut sangrah mein aakar ki drishti se ‘laghu vyangya’ aur ‘laghu kahaniyan’ sangrihit hain. Ye lekhak ka shabd sanyam hi hai ki usne ‘gagar mein sagar’ bharne ka chamatkar kar dikhaya hai. Sharad joshi ke sarokar prshast hain. In vyangyon aur laghu kahaniyon mein shilp ki tikshnta sarokaron ko aur paina kar deti hai. ‘jiske hum mama hain’ mein ve likhte hain, ‘aap prjatantr ki ganga mein dubki lagate hain. Bahar nikalne par dekhte hain ki vah shakhs jo kal aapke charan chhuta tha, aapka vot lekar gayab ho gaya. Voton ki puri peti lekar bhag gaya. ’
‘ghav karen gambhir’ ke vyangya ki dhar duhri hai. Pathak jahan parivesh ki visangatiyon ke prati sachet hota hai, vahin apne antarvirodhon ke prati usmen sajagta jagrat hoti hai. Chhote-chhote anubhav, lokakthaon sarikha svad, vyanjnaon ka samaroh aur shilp ki navinta prastut pustak ki rekhankit karne yogya visheshtayen hain.
Sharad joshi ke asankhya pathkon ke liye ek uphar hai ye.