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Geetika

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‘गीतिका’ में संकलित अधिकांश गीतों का विषय प्रेम, यौवन और सौन्दर्य है, जिसकी अभिव्यक्ति के लिए निराला कहीं नारी को सम्बोधित करते हैं तो कहीं प्रकृति को, लेकिन आह्लाद की चरम अवस्था में नारी और प्रकृति का भेद ही मिट जाता है और तब नारी तथा प्रकृति एकमेक हो उठती... Read More

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Description

‘गीतिका’ में संकलित अधिकांश गीतों का विषय प्रेम, यौवन और सौन्दर्य है, जिसकी अभिव्यक्ति के लिए निराला कहीं नारी को सम्बोधित करते हैं तो कहीं प्रकृति को, लेकिन आह्लाद की चरम अवस्था में नारी और प्रकृति का भेद ही मिट जाता है और तब नारी तथा प्रकृति एकमेक हो उठती हैं। कुछ गीत प्रार्थनापरक भी हैं, लेकिन स्वर इनका भी उल्लासपूर्ण ही है।
महाकवि निराला के काव्य में गीतिका का विशिष्ट स्थान है। इसमें संकलित गीत एक ओर उत्कृष्ट कविता का साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, तो दूसरी ओर निराला के गहन संगीत-ज्ञान का। कविता और संगीत का ऐसा सामंजस्य हिन्दी कविता में दुर्लभ है। ‘gitika’ mein sanklit adhikansh giton ka vishay prem, yauvan aur saundarya hai, jiski abhivyakti ke liye nirala kahin nari ko sambodhit karte hain to kahin prkriti ko, lekin aahlad ki charam avastha mein nari aur prkriti ka bhed hi mit jata hai aur tab nari tatha prkriti ekmek ho uthti hain. Kuchh git prarthnaprak bhi hain, lekin svar inka bhi ullaspurn hi hai. Mahakavi nirala ke kavya mein gitika ka vishisht sthan hai. Ismen sanklit git ek or utkrisht kavita ka sakshya prastut karte hain, to dusri or nirala ke gahan sangit-gyan ka. Kavita aur sangit ka aisa samanjasya hindi kavita mein durlabh hai.

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