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Dukh Chitthirasa Hai

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पिछली अधसदी से अधिक समय से कविता लिख रहे अशोक वाजपेयी ने अपनी कविता में जो जगह बनाई है, वह अब अधिक अनुभव-समृद्ध, आत्ममंथनकारी और नये ढंग से बेचैन है। उल्लास का उजाला और अवसाद की छाया उसे एक ऐसी रंगत देती है जो आज की कविता में प्रायः दुर्लभ... Read More

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Description

पिछली अधसदी से अधिक समय से कविता लिख रहे अशोक वाजपेयी ने अपनी कविता में जो जगह बनाई है, वह अब अधिक अनुभव-समृद्ध, आत्ममंथनकारी और नये ढंग से बेचैन है। उल्लास का उजाला और अवसाद की छाया उसे एक ऐसी रंगत देती है जो आज की कविता में प्रायः दुर्लभ है।
जीवनासक्ति और प्रश्नांकन की उनकी परम्परा इस संग्रह में नई सघनता और उत्कटता के साथ चरितार्थ हुई है। उनकी काव्यभाषा का परिसर अन्तर्ध्वनित भी है और बहिर्मुख भी। सामाजिक को निजी और निजी को सामाजिक मानने पर लगातार इसरार करनेवाले इस सयाने कवि का विवेक इस द्वैत को लाँघकर अब ऐसे मुक़ाम पर है जहाँ कविता अनुभव और विचार एक साथ है। Pichhli adhasdi se adhik samay se kavita likh rahe ashok vajpeyi ne apni kavita mein jo jagah banai hai, vah ab adhik anubhav-samriddh, aatmmanthankari aur naye dhang se bechain hai. Ullas ka ujala aur avsad ki chhaya use ek aisi rangat deti hai jo aaj ki kavita mein prayः durlabh hai. Jivnasakti aur prashnankan ki unki parampra is sangrah mein nai saghanta aur utkatta ke saath charitarth hui hai. Unki kavybhasha ka parisar antardhvnit bhi hai aur bahirmukh bhi. Samajik ko niji aur niji ko samajik manne par lagatar israr karnevale is sayane kavi ka vivek is dvait ko langhakar ab aise muqam par hai jahan kavita anubhav aur vichar ek saath hai.

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