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Dollar Tatha Anya Kahaniyan
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में जीवन से अपने रक्त की एक-एक बूंद की हद तक प्यार करता हूँ इसलिए मनुष्यता का सत्कार, प्रेम मेरा धर्म है, पहली कविता, पहली कहानी से अब तक जो कुछ भी लिखा मनुष्यता के हक में लिखा, सम्वेदना जगाये रखने के लिए लिखा, अन्याय, दमन, भेदभाव, गरीबी, जलालत, गुलामी के विरोध में लिखा, व्यर्थता, नींद, नशे से एक-एक पल बचा कर सार्थकता, जागरणा, चेतना में हर पल गुजारने की सदा कोशिश की, अपने समय को समझने की कोशिश की, बदलते हुए समय में बदलते हुए सामाजिक सम्बन्धों को अलग-अलग कोण से परखने की कोशिश की और रचनाओं का विषय बनाया। 1990 के आस-पास जो हालात बदले हैं, भूमण्डलीकरण उदारतावाद ने जो हालात पैदा किये हैं, वे दूसरी गुलामी के हालात हैं, आर्थिक साम्राज्यवाद के सामने आँखें बन्द किये रखना, अन्धत्व से कम नहीं, साहित्य और कला को राजनीति निरपेक्ष मानना कबूतर की तरह आँखें मूंदने जैसा है। अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करते मनुष्य की पुकार या विजय यात्रा को अंकित करना साहित्य का दायित्व है। इसी संघर्ष में हमारा छोटा बड़ा हिस्सा, समवेत प्रयास से पाना खोजना ताहित्य संस्कृति का अंग है, गोया हम इस तरह के अमानवीकरण को जान-समझ तो गए हैं परन्तु साहित्य के लोकतन्त्र में दमनकारी चीजों से हट कर लिखते जाना प्राणविहीन रचना जैसा है। इसके चलते मनुष्यता, मानवीय सम्बन्धों का निरन्तर हास हुआ है। गरीब, कमजोर, सताये हुए लोगों को उनके भाग्य पर छोड़कर अलग कोने में चले जाना कभी भी प्राथमिक कार्य नहीं हो सकता। जीवन की मामूली दिखने वाली चीजें बड़े कार्य व्यवहार से जुड़ी रहती हैं। यदि मुझे घर में घर के बाहर गन्दगी नजर नहीं आती और मन परेशान नहीं होता तो मुझे भीतर की गन्दगी भी परेशान नहीं करेगी। धीरे-धीरे गन्दगी और फिर दरिन्दगी को बर्दाश्त करते रहना आ जाएगा। पतनोन्मुख हालात पतनोन्मुख नहीं लगते तब बहुत कुछ पथराने लगता है।
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