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Do Khirkiyan

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‘दो खिड़कियाँ’ में पंजाबी की सुप्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम की मर्मस्पर्शी रचनाएँ संग्रहीत हैं। इनमें सात कहानियाँ, एक लघु उपन्यास और सबसे अन्‍त में एक ऐसा प्रयोग है जिसमें दुनिया के नौ उपन्यासों में से नौ पात्र चुनकर उनकी मनोदशा को समझने की कोशिश की गई है—हर पात्र की आत्मा... Read More

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Description

‘दो खिड़कियाँ’ में पंजाबी की सुप्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम की मर्मस्पर्शी रचनाएँ संग्रहीत हैं। इनमें सात कहानियाँ, एक लघु उपन्यास और सबसे अन्‍त में एक ऐसा प्रयोग है जिसमें दुनिया के नौ उपन्यासों में से नौ पात्र चुनकर उनकी मनोदशा को समझने की कोशिश की गई है—हर पात्र की आत्मा में पैठकर।
‘दो खिड़कियाँ’ जिसके आधार पर इस संग्रह का नामकरण हुआ है, दुनिया के निज़ाम पर भयानक व्यंग्य करती हुई कहानी है। इसकी नायिका के शब्द उसके कमरे की सामनेवाली खिड़की में से निकलकर बाहर सड़क पर चले गए हैं और अर्थ पिछली खिड़की में से निकलकर जंगल में खो गए हैं। छह अन्य कहानियों में स्त्री और स्त्री के रिश्ते का विश्लेषण है। इन छहों कहानियों का शीर्षक एक ही है—‘दो औरतें’। ‘पक्की हवेली’ शीर्षक लघु उपन्यास में भूत-प्रेतों वाली एक हवेली का दर्द एक छोटी-सी बच्ची की ज़बानी है जो मनुष्य के मन की गुत्थियों को समझने में असमर्थ है पर डरती-काँपती और रोती उसको समझने का प्रयत्न करती है।
संग्रह की सारी रचनाएँ अमृता प्रीतम की स्वभावगत भावुकता से ओत-प्रोत हैं और मन पर बड़ा कवित्वमय प्रभाव छोड़ती हैं। ‘do khidakiyan’ mein panjabi ki suprsiddh lekhika amrita pritam ki marmasparshi rachnayen sangrhit hain. Inmen saat kahaniyan, ek laghu upanyas aur sabse an‍ta mein ek aisa pryog hai jismen duniya ke nau upanyason mein se nau patr chunkar unki manodsha ko samajhne ki koshish ki gai hai—har patr ki aatma mein paithkar. ‘do khidakiyan’ jiske aadhar par is sangrah ka namakran hua hai, duniya ke nizam par bhayanak vyangya karti hui kahani hai. Iski nayika ke shabd uske kamre ki samnevali khidki mein se nikalkar bahar sadak par chale ge hain aur arth pichhli khidki mein se nikalkar jangal mein kho ge hain. Chhah anya kahaniyon mein stri aur stri ke rishte ka vishleshan hai. In chhahon kahaniyon ka shirshak ek hi hai—‘do aurten’. ‘pakki haveli’ shirshak laghu upanyas mein bhut-preton vali ek haveli ka dard ek chhoti-si bachchi ki zabani hai jo manushya ke man ki gutthiyon ko samajhne mein asmarth hai par darti-kanpati aur roti usko samajhne ka pryatn karti hai.
Sangrah ki sari rachnayen amrita pritam ki svbhavgat bhavukta se ot-prot hain aur man par bada kavitvmay prbhav chhodti hain.