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Devi Ke DPT Banane Ki Kahani

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देवी प्रसाद त्रिपाठी के रूप में छात्र सक्रियतावादी का अपना सफ`र शुरू करनेवाले डीपीटी ने जे.एन.यू छात्रसंघ के इतिहास में सबसे लम्बी अवधि तक अध्यक्ष-पद पर बने रहने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने 1973 में श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा थोपे गए बदनाम आपातकाल के दौरान इस... Read More

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देवी प्रसाद त्रिपाठी के रूप में छात्र सक्रियतावादी का अपना सफ`र शुरू करनेवाले डीपीटी ने जे.एन.यू छात्रसंघ के इतिहास में सबसे लम्बी अवधि तक अध्यक्ष-पद पर बने रहने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने 1973 में श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा थोपे गए बदनाम आपातकाल के दौरान इस विश्वविद्यालय में एक गौरवपूर्ण प्रतिरोध-आन्दोलन का नेतृत्व किया। परिसर में आज भी उनकी एक नायक की छवि बनी हुई है। डीपीटी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी के विश्वासपात्र और घनिष्ठ सहयोगी थे। मीडिया उनका उल्लेख मानव कम्प्यूटर के रूप में करता था। डीपीटी ने विदेशों में पचास से अधिक विश्वविद्यालयों में व्याख्यान दिए हैं और कुछ समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाया भी।
राज्यसभा के सदस्य रहे डीपीटी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महासचिव और प्रमुख प्रवक्ता रहे। वह विचार न्यास के संस्थापक और विचार प्रधान पत्रिका ‘थिंक इंडिया क्वार्टरली’ के मुख्य सम्पादक भी थे। Javaharlal nehru vishvvidyalay mein devi prsad tripathi ke rup mein chhatr sakriytavadi ka apna saph`ra shuru karnevale dipiti ne je. En. Yu chhatrsangh ke itihas mein sabse lambi avadhi tak adhyaksh-pad par bane rahne ka gaurav prapt kiya. Unhonne 1973 mein shrimti indira gandhi dvara thope ge badnam aapatkal ke dauran is vishvvidyalay mein ek gauravpurn pratirodh-andolan ka netritv kiya. Parisar mein aaj bhi unki ek nayak ki chhavi bani hui hai. Dipiti bharat ke purv prdhanmantri sv. Shri rajiv gandhi ke vishvaspatr aur ghanishth sahyogi the. Midiya unka ullekh manav kampyutar ke rup mein karta tha. Dipiti ne videshon mein pachas se adhik vishvvidyalyon mein vyakhyan diye hain aur kuchh samay ilahabad vishvvidyalay mein padhaya bhi. Rajyasbha ke sadasya rahe dipiti rashtrvadi kangres parti ke mahaschiv aur prmukh prvakta rahe. Vah vichar nyas ke sansthapak aur vichar prdhan patrika ‘think indiya kvartarli’ ke mukhya sampadak bhi the.