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Choti Ki Pakar

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हिन्दी कथा-साहित्य की यथार्थवादी परम्परा में निराला की कथाकृतियों का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। उनकी प्रायः हर कथाकृति का परिवेश सामाजिक यथार्थ से अनुप्राणित है। यही कारण है कि उनके कतिपय ऐतिहासिक पात्रों को भी हम एक सुस्पष्ट सामाजिक भूमिका में देखते हैं। ‘चोटी की पकड़’ यद्यपि ऐतिहासिक उपन्यास नहीं... Read More

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Description

हिन्दी कथा-साहित्य की यथार्थवादी परम्परा में निराला की कथाकृतियों का एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। उनकी प्रायः हर कथाकृति का परिवेश सामाजिक यथार्थ से अनुप्राणित है। यही कारण है कि उनके कतिपय ऐतिहासिक पात्रों को भी हम एक सुस्पष्ट सामाजिक भूमिका में देखते हैं।
‘चोटी की पकड़’ यद्यपि ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है, लेकिन इतिहास के खँडहर इसमें पूरी तरह मौजूद हैं। इन्हीं खँडहरों के बीच नया इतिहास लिखा जा रहा है। बदलते समाज में टूटने और जुड़ने की प्रक्रिया चल रही है। स्वाधीनता की देवी जनता के हाथों अभिषिक्त होने जा रही है। स्वदेशी आन्दोलन की अनुगूँजें हर ओर सुनाई पड़ रही हैं, जिससे कुछ राजा और सामन्त भी उसका समर्थन करने को विवश हैं। लेकिन इस कथा-परिवेश में जितने भी चरित्र हैं, उनमें एक मुन्ना बाँदी भी है। अविस्मरणीय चरित्र है यह, जिसे निराला ने गहरी सहानुभूति से गढ़ा है। Hindi katha-sahitya ki yatharthvadi parampra mein nirala ki kathakritiyon ka ek mahattvpurn sthan hai. Unki prayः har kathakriti ka parivesh samajik yatharth se anupranit hai. Yahi karan hai ki unke katipay aitihasik patron ko bhi hum ek suspasht samajik bhumika mein dekhte hain. ‘choti ki pakad’ yadyapi aitihasik upanyas nahin hai, lekin itihas ke khandahar ismen puri tarah maujud hain. Inhin khandaharon ke bich naya itihas likha ja raha hai. Badalte samaj mein tutne aur judne ki prakriya chal rahi hai. Svadhinta ki devi janta ke hathon abhishikt hone ja rahi hai. Svdeshi aandolan ki anugunjen har or sunai pad rahi hain, jisse kuchh raja aur samant bhi uska samarthan karne ko vivash hain. Lekin is katha-parivesh mein jitne bhi charitr hain, unmen ek munna bandi bhi hai. Avismarniy charitr hai ye, jise nirala ne gahri sahanubhuti se gadha hai.