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Chiwar

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उपन्यासकार रांगेय राघव ने ‘सीधा सादा रास्ता’ और ‘कब तक पुकारूँ’ जैसे समकालीन विषय-वस्तु पर आधारित उपन्यासों के साथ ऐतिहासिक उपन्यासों से भी हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है। अपनी मार्क्सवादी विश्व-दृष्टि के आधार पर वे प्रत्येक विषय को अपने ख़ास नज़रिए से चित्रित करते हैं। ‘चीवर’ उनके प्रमुखतम ऐतिहासिक... Read More

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Description

उपन्यासकार रांगेय राघव ने ‘सीधा सादा रास्ता’ और ‘कब तक पुकारूँ’ जैसे समकालीन विषय-वस्तु पर आधारित उपन्यासों के साथ ऐतिहासिक उपन्यासों से भी हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है। अपनी मार्क्सवादी विश्व-दृष्टि के आधार पर वे प्रत्येक विषय को अपने ख़ास नज़रिए से चित्रित करते हैं।
‘चीवर’ उनके प्रमुखतम ऐतिहासिक उपन्यासों में से एक है। इसमें उन्होंने हर्षवर्धन काल के पतनशील भारतीय सामन्तवाद को रेखांकित किया है। ब्राह्मण और बौद्ध मतों के परस्पर संघर्ष के साथ-साथ मालव गुप्तों, वर्धनों और मौखरियों के बीच राजनीतिक सत्ता के लिए होनेवाला संघर्ष भी हमें यहाँ दिखाई देता है।
भाषा के स्तर पर यह उपन्यास सिद्ध करता है कि शब्दावली अगर घोर तत्समप्रधान हो तब भी उसमें रस की सर्जना की जा सकती है—बशर्ते लेखनी किसी समर्थ रचनाकार के हाथ में हो। यह इस उपन्यास की प्रवहमान भाषा का ही कमाल है कि इसमें विचरनेवाले पात्र, वह चाहे राज्यश्री हो या हर्षवर्धन या कोई और हमारी स्मृति पर अंकित हो जाते हैं। Upanyaskar rangey raghav ne ‘sidha sada rasta’ aur ‘kab tak pukarun’ jaise samkalin vishay-vastu par aadharit upanyason ke saath aitihasik upanyason se bhi hindi sahitya ko samriddh kiya hai. Apni marksvadi vishv-drishti ke aadhar par ve pratyek vishay ko apne khas nazariye se chitrit karte hain. ‘chivar’ unke pramukhtam aitihasik upanyason mein se ek hai. Ismen unhonne harshvardhan kaal ke patanshil bhartiy samantvad ko rekhankit kiya hai. Brahman aur bauddh maton ke paraspar sangharsh ke sath-sath malav gupton, vardhnon aur maukhariyon ke bich rajnitik satta ke liye honevala sangharsh bhi hamein yahan dikhai deta hai.
Bhasha ke star par ye upanyas siddh karta hai ki shabdavli agar ghor tatsmaprdhan ho tab bhi usmen ras ki sarjna ki ja sakti hai—basharte lekhni kisi samarth rachnakar ke hath mein ho. Ye is upanyas ki pravahman bhasha ka hi kamal hai ki ismen vicharnevale patr, vah chahe rajyashri ho ya harshvardhan ya koi aur hamari smriti par ankit ho jate hain.