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Chhayawad

Namvar Singh

Rs. 395 Rs. 352

Rajkamal Prakashan

आलोचकों के विवेचन से कहीं यह स्पष्ट नहीं होता कि छायावादी स्वानुभूति संतों-भक्तों के आत्मनिवेदन से किस बात में भिन्न है; छायावादी कल्पना में प्राचीन कवियों की अप्रस्तुत-विधायिनी कल्पना से क्या विशेषता है; प्रकृति का मानवीकरण करने में छायावाद ने संस्कृत कवियों से कितनी अधिक स्वच्छंदता दिखलाई है, आदि। इन... Read More

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Description

आलोचकों के विवेचन से कहीं यह स्पष्ट नहीं होता कि छायावादी स्वानुभूति संतों-भक्तों के आत्मनिवेदन से किस बात में भिन्न है; छायावादी कल्पना में प्राचीन कवियों की अप्रस्तुत-विधायिनी कल्पना से क्या विशेषता है; प्रकृति का मानवीकरण करने में छायावाद ने संस्कृत कवियों से कितनी अधिक स्वच्छंदता दिखलाई है, आदि। इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर दिए बिना छायावाद के काव्य-सौंदर्य का कोई विवेचन पूर्ण नहीं कहा जा सकता।
इस पुस्तक में छायावाद की काव्यगत विशेषताओं को स्पष्ट करते हुए छाया-चित्रों में निहित सामाजिक सत्य का उद्घाटन किया गया है। छायावाद पर अनेक पुस्तकों के रहते हुए भी यह पुस्तक दृष्टि की मौलिकता; विवेचन की स्पष्टता तथा आलोचना-शैली की सर्जनात्मकता के लिए लोकप्रिय रही है।
पुस्तक में कुल बारह अध्याय हैं जिनके शीर्षक क्रमश: इस प्रकार हैं : प्रथम राशि, केवल मैं केवल मैं, एक कर दे पृथ्वी आकाश, पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश, देवि माँ सहचरि प्राण, जागोफिर एक बार, कल्पना के कानन की रानी, रूप-विन्यास, पद विन्यास, खुल गए छंद के बंध, जिसके आगे राह नहीं तथा परंपरा और प्रगति। Aalochkon ke vivechan se kahin ye spasht nahin hota ki chhayavadi svanubhuti santon-bhakton ke aatmanivedan se kis baat mein bhinn hai; chhayavadi kalpna mein prachin kaviyon ki aprastut-vidhayini kalpna se kya visheshta hai; prkriti ka manvikran karne mein chhayavad ne sanskrit kaviyon se kitni adhik svachchhandta dikhlai hai, aadi. In prashnon ka spasht uttar diye bina chhayavad ke kavya-saundarya ka koi vivechan purn nahin kaha ja sakta. Is pustak mein chhayavad ki kavygat visheshtaon ko spasht karte hue chhaya-chitron mein nihit samajik satya ka udghatan kiya gaya hai. Chhayavad par anek pustkon ke rahte hue bhi ye pustak drishti ki maulikta; vivechan ki spashtta tatha aalochna-shaili ki sarjnatmakta ke liye lokapriy rahi hai.
Pustak mein kul barah adhyay hain jinke shirshak krmash: is prkar hain : prtham rashi, keval main keval main, ek kar de prithvi aakash, pal-pal parivartit prkriti-vesh, devi man sahachari pran, jagophir ek baar, kalpna ke kanan ki rani, rup-vinyas, pad vinyas, khul ge chhand ke bandh, jiske aage raah nahin tatha parampra aur pragati.