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Chhayavad : Prasad, Nirala, Mahadevi Aur Pant

Rs. 595 Rs. 530

‘छायावाद’ पुस्तक में जहाँ छायावाद की समूहगत सामान्य प्रवृत्तियों के विश्लेषण का विशेष आग्रह था, वहीं प्रस्तुत पुस्तक में प्रसाद, निराला, महादेवी और पन्त के वैशिष्ट्य और नवीन पक्षों पर विशेष दृष्टि डाली गई है। सौन्दर्य के समान महान सृजक भी विशिष्ट होते हैं। हिन्दी साहित्य ‘ग्लैक्सी’ की विभूतियाँ हैं—प्रसाद,... Read More

Description

‘छायावाद’ पुस्तक में जहाँ छायावाद की समूहगत सामान्य प्रवृत्तियों के विश्लेषण का विशेष आग्रह था, वहीं प्रस्तुत पुस्तक में प्रसाद, निराला, महादेवी और पन्त के
वैशिष्ट्य और नवीन पक्षों पर विशेष दृष्टि डाली गई है। सौन्दर्य के समान महान सृजक भी विशिष्ट होते हैं।
हिन्दी साहित्य ‘ग्लैक्सी’ की विभूतियाँ हैं—प्रसाद, निराला, महादेवी और पन्त। इन विभूतियों की अपनी अलग विशिष्ट पहचान है। इनका व्यक्तित्व, भाव, तेवर, भाषा और अन्दाज़ अलग-अलग और विशिष्ट है। इस पुस्तक में समानता के समानान्तर इन अपरिहार्य हस्ताक्षरों की विशिष्टताओं को केन्द्रीयता मिली है। इसमें प्रसाद, निराला, महादेवी और पन्त की साहित्यिकता की मौलिक एवं नूतन अर्थ-मीमांसा के साथ-साथ नवीन 'कैनन' का भी आग्रह है। छायावाद के बाद से लेकर आज तक की कविताओं की उपलब्धियों, सीमाओँ, चुनौतियों और सम्भावनाओं के वृहत्तर दायरे में यह छायावादी रचनाशीलता के पुनर्मूल्यांकन की एक अनुप्रेक्षणीय समीक्षा-यात्रा है। ‘chhayavad’ pustak mein jahan chhayavad ki samuhgat samanya prvrittiyon ke vishleshan ka vishesh aagrah tha, vahin prastut pustak mein prsad, nirala, mahadevi aur pant keVaishishtya aur navin pakshon par vishesh drishti dali gai hai. Saundarya ke saman mahan srijak bhi vishisht hote hain.
Hindi sahitya ‘glaiksi’ ki vibhutiyan hain—prsad, nirala, mahadevi aur pant. In vibhutiyon ki apni alag vishisht pahchan hai. Inka vyaktitv, bhav, tevar, bhasha aur andaz alag-alag aur vishisht hai. Is pustak mein samanta ke samanantar in apariharya hastakshron ki vishishttaon ko kendriyta mili hai. Ismen prsad, nirala, mahadevi aur pant ki sahityikta ki maulik evan nutan arth-mimansa ke sath-sath navin kainan ka bhi aagrah hai. Chhayavad ke baad se lekar aaj tak ki kavitaon ki uplabdhiyon, simaon, chunautiyon aur sambhavnaon ke vrihattar dayre mein ye chhayavadi rachnashilta ke punarmulyankan ki ek anuprekshniy samiksha-yatra hai.