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Chehre

Nida Fazli

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Vani Prakashan

अदब का ताल्लुक दिल के रिश्ते से होता है, हमारे अहसास की पैमाइश और गहराई की अभिव्यक्ति कोई लफ्ज़ नहीं बल्कि ज़ज्बातों का सैलाब होता है, जिसे हम जीते हैं, महसूस करते हैं। जिन्दगी इन्हीं खट्टे-मीठे तजुरबों की कहानी बन जाती है। कुछ कलन्दर इसे अपने इशारे पर नचाते हैं... Read More

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Description
अदब का ताल्लुक दिल के रिश्ते से होता है, हमारे अहसास की पैमाइश और गहराई की अभिव्यक्ति कोई लफ्ज़ नहीं बल्कि ज़ज्बातों का सैलाब होता है, जिसे हम जीते हैं, महसूस करते हैं। जिन्दगी इन्हीं खट्टे-मीठे तजुरबों की कहानी बन जाती है। कुछ कलन्दर इसे अपने इशारे पर नचाते हैं और कुछ को ये। उर्दू अदब की दौलत ऐसे दीवाने-फनकारों से हमेशा लबरेज़ रही है जिन्होंने अपनी कहानी को लफ्ज़ो के दस्तावेज़ से रोशन किया है। निदा फाज़ली ‘चेहरे’ उर्दू अदब के ऐसे ही मस्त-कलन्दरों की जिश्न्दगी की आपबीती है। मशहूर शाइरों का अन्दाज़े -बयां, उनका तौर-तरीका, ख्वाहिशे , हसद, मोहब्बतें, चाल-चलन, सादगी, रवानी, मिठास और लोच को निदा फ़ाज़ली की कलम जिस तरह से बयां करती है वो कमाल है। लगता है ये किसी का जाति मामला नहीं बल्कि हमारा ही आईना है जिसमें हमें अपना ही चेहरा दिखाई देता है।