BackBack
-11%

Charaksanhita Ke Jiva-Jantu

Rs. 950 Rs. 846

चरकसंहिता’ व्यापक रूप से पढ़ा-पढ़ाया जानेवाला आयुर्वेद का प्रतिष्ठित ग्रन्थ है। महर्षि चरक ने इसमें अनेक प्रकार के मानव उपयोगी जीव-जन्तुओं का उल्लेख किया है। वनों, वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं के अन्वेषक, प्राणि-विशेषज्ञ रामेश बेदी ने अपनी दीर्घकालीन अनुभव के आधार पर उनकी प्रकृति और जातियों को ध्यान में रखते हुए... Read More

BlackBlack
Vendor: Rajkamal Categories: Rajkamal Prakashan Books Tags: Nature
Description

चरकसंहिता’ व्यापक रूप से पढ़ा-पढ़ाया जानेवाला आयुर्वेद का प्रतिष्ठित ग्रन्थ है। महर्षि चरक ने इसमें अनेक प्रकार के मानव उपयोगी जीव-जन्तुओं का उल्लेख किया है।
वनों, वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं के अन्वेषक, प्राणि-विशेषज्ञ रामेश बेदी ने अपनी दीर्घकालीन अनुभव के आधार पर उनकी प्रकृति और जातियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इन वर्गों में श्रेणीबद्ध किया है : स्तनपायी की 44 जातियाँ; पक्षियों की 42 जातियाँ; सरीसृपों की 12 जातियाँ; क्षुद्र जीवों की 12 जातियाँ; कुल 110 जातियाँ।
इन जीव-जन्तुओं के सम्बन्ध में दिए गए 46 रंगीन फ़ोटो तथा 128 सादे चित्र इनके स्वरूप को भली-भाँति समझने में सहायक होंगे।
‘चरकसंहिता’ के जीव-जन्तुओं के स्वरूप, रहन-सहन, आहार-विहार, पारिवारिक जीवन, प्रजनन, सन्तान का पालन-पोषण, इनसान के साथ उनका स्नेहिल व्यवहार, इनसान के लिए उनकी उपादेयता का लेखक ने विस्तार से परिचय दिया है। लेखक के अनुभव रोचक हैं। भाषा सरल, प्रवाहमयी और आकर्षक है।
हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं साहित्यिक कृति सम्मान (2000-2001) प्राप्त। Charaksanhita’ vyapak rup se padha-padhaya janevala aayurved ka prtishthit granth hai. Maharshi charak ne ismen anek prkar ke manav upyogi jiv-jantuon ka ullekh kiya hai. Vanon, vanaspatiyon aur jiv-jantuon ke anveshak, prani-visheshagya ramesh bedi ne apni dirghkalin anubhav ke aadhar par unki prkriti aur jatiyon ko dhyan mein rakhte hue unhen in vargon mein shrenibaddh kiya hai : stanpayi ki 44 jatiyan; pakshiyon ki 42 jatiyan; sarisripon ki 12 jatiyan; kshudr jivon ki 12 jatiyan; kul 110 jatiyan.
In jiv-jantuon ke sambandh mein diye ge 46 rangin foto tatha 128 sade chitr inke svrup ko bhali-bhanti samajhne mein sahayak honge.
‘charaksanhita’ ke jiv-jantuon ke svrup, rahan-sahan, aahar-vihar, parivarik jivan, prajnan, santan ka palan-poshan, insan ke saath unka snehil vyavhar, insan ke liye unki upadeyta ka lekhak ne vistar se parichay diya hai. Lekhak ke anubhav rochak hain. Bhasha saral, prvahamyi aur aakarshak hai.
Hindi akadmi, dilli dvara prshasti patr evan sahityik kriti samman (2000-2001) prapt.